होम मेकर नहीं नेशन बिल्डर हैं महिलाएं, 23 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी, सड़क हादसे में मिलने वाले मुआवजे को लेकर भी लिया बड़ा फैसला 

क्या घर संभालने वाली महिलाओं के काम की कोई आर्थिक कीमत होती है? क्या एक गृहिणी की भूमिका सिर्फ रसोई और बच्चों की देखभाल तक सीमित है? 23 साल पुराने एक सड़क हादसे के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इन सवालों का ऐसा जवाब दिया है, जो देश की करोड़ों महिलाओं की पहचान और सम्मान से जुड़ा है।  इतना ही नहीं, कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाली गृहिणियों के परिवारों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर भी बड़ा फैसला सुनाया है, जो भविष्य में लाखों परिवारों को प्रभावित कर सकता है। 

Jun 11, 2026 - 14:50
Jun 11, 2026 - 14:53
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होम मेकर नहीं नेशन बिल्डर हैं महिलाएं, 23 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी, सड़क हादसे में मिलने वाले मुआवजे को लेकर भी लिया बड़ा फैसला 

देश की करोड़ों महिलाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला लिया। वर्षों से घर, परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां निभाने वाली गृहिणियों को अक्सर आर्थिक पैमाने पर नहीं आंका जाता था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि घर संभालने वाली महिलाएं केवल होममेकर नहीं, बल्कि नेशन बिल्डर हैं। अदालत ने माना कि परिवार की नींव मजबूत करने और अगली पीढ़ी को तैयार करने में उनकी भूमिका किसी भी पेशेवर काम से कम नहीं है।

सड़क हादसे के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया फैसला 
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाली गृहिणियों के परिवारों को मिलने वाले मुआवजे से जुड़ा है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि यदि किसी गृहिणी की सड़क दुर्घटना में मौत हो जाती है तो उसके घरेलू काम और पारिवारिक योगदान का मूल्य कम से कम 30 हजार रुपए प्रति माह यानी 3.6 लाख रुपए सालाना माना जाना चाहिए। यह राशि मुआवजा तय करने के अन्य मानकों से अलग होगी और उसके अतिरिक्त जोड़ी जाएगी।

भविष्य का निर्माण करती हैं महिलाएं 
फैसले में अदालत ने कहा कि गृहिणी का काम केवल भोजन बनाना, कपड़े धोना या बच्चों की देखभाल तक सीमित नहीं है। वह पूरे परिवार की भावनात्मक, सामाजिक और नैतिक संरचना को मजबूत बनाती है। बच्चों के संस्कार, परिवार की स्थिरता और भविष्य की पीढ़ियों के निर्माण में उसका योगदान अमूल्य होता है। इसलिए किसी दुर्घटना के बाद मुआवजा तय करते समय उसके योगदान को केवल शून्य आय के आधार पर नहीं देखा जा सकता।

पहले कैसे तय होता था मुआवजा?
अब तक सड़क दुर्घटना मामलों में गृहिणियों के लिए मुआवजा तय करने का कोई स्पष्ट राष्ट्रीय मानक नहीं था। अधिकांश मामलों में अदालतें और मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल राज्य के न्यूनतम वेतन को आधार बनाकर गृहिणी की काल्पनिक आय निर्धारित करते थे। इससे मुआवजे की राशि काफी कम रह जाती थी और घर के भीतर किए जाने वाले उनके वास्तविक श्रम का सही मूल्यांकन नहीं हो पाता था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुआवजा न तो ऐसा होना चाहिए जो किसी के लिए लॉटरी जैसा लगे और न ही इतना कम कि पीड़ित परिवार के साथ मजाक प्रतीत हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि गृहिणी की उम्र, शिक्षा, कौशल, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे पहलुओं को भी मुआवजा तय करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।

23 साल पुराने केस को लेकर सुनाया फैसला 
यह फैसला पंजाब की रेशमा नाम की महिला से जुड़े एक मामले में आया है, जिनकी 2001 में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनके पति और तीन बच्चों ने मुआवजे के लिए दावा किया था। ट्रिब्यूनल ने 2003 में फैसला दिया, लेकिन मामला वर्षों तक अदालतों में चलता रहा। दिसंबर 2024 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मुआवजा बढ़ाने का आदेश दिया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने दो दशक तक न्याय मिलने में हुई देरी पर भी गंभीर चिंता जताई। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों को महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना मुआवजा मामलों का निपटारा सामान्य परिस्थितियों में एक वर्ष के भीतर हो जाना चाहिए। यदि पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए वर्षों या दशकों तक इंतजार करना पड़े, तो कानून का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। अदालत ने सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से ऐसे मामलों की निगरानी करने और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने की अपील की है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content