घर का मंदिर किस दिशा में होना चाहिए? जानिए वास्तु शास्त्र के महत्वपूर्ण नियम

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में मंदिर स्थापित करने की सर्वोत्तम दिशा जानें। मंदिर कहाँ स्थापित करें, किन स्थानों पर इसे स्थापित करने से बचें, और पूजा स्थल में मूर्तियों और चित्रों को रखने के महत्वपूर्ण नियम जानें।

Jun 7, 2026 - 09:55
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घर का मंदिर किस दिशा में होना चाहिए? जानिए वास्तु शास्त्र के महत्वपूर्ण नियम

हिंदू धर्म में घर का मंदिर केवल पूजा-पाठ करने की जगह नहीं माना जाता, बल्कि इसे घर की आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र भी समझा जाता है। मान्यता है कि मंदिर की सही दिशा घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वास्तु शास्त्र में पूजा स्थल को लेकर कई नियम बताए गए हैं, जिनका पालन शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि सही दिशा में स्थापित मंदिर से मानसिक तनाव कम होता है और परिवार के सदस्यों पर भगवान की कृपा बनी रहती है। वहीं गलत स्थान पर बना पूजा घर कई बार नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकता है। इसलिए मंदिर की दिशा और उसकी व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

ईशान कोण को माना गया है सबसे शुभ
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मंदिर उत्तर-पूर्व दिशा, यानी ईशान कोण में बनाना सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा को देवताओं की दिशा कहा जाता है और इसे आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख स्रोत भी माना जाता है। मान्यता है कि ईशान कोण में पूजा करने से मन एकाग्र रहता है और सकारात्मक विचारों का विकास होता है। यदि किसी कारण से उत्तर-पूर्व दिशा में मंदिर बनाना संभव न हो, तो उत्तर या पूर्व दिशा में भी पूजा स्थल बनाया जा सकता है। साथ ही पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना गया है। इससे पूजा का सकारात्मक प्रभाव बढ़ता है और घर का वातावरण शांत बना रहता है।

इन स्थानों पर नहीं बनाना चाहिए मंदिर
वास्तु शास्त्र में कुछ स्थानों को पूजा घर के लिए अनुपयुक्त बताया गया है। इसके अनुसार मंदिर कभी भी शौचालय, बाथरूम या सीढ़ियों के नीचे नहीं बनाना चाहिए। इन स्थानों पर पूजा स्थल बनाना शुभ नहीं माना जाता। इसके अलावा बेडरूम में मंदिर रखने से भी बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि यदि घर में जगह की कमी हो और बेडरूम में मंदिर रखना आवश्यक हो, तो उसे पर्दे या लकड़ी के दरवाजे से ढककर रखना बेहतर माना जाता है। रसोईघर के बिल्कुल पास या ऐसी जगह जहां लगातार शोर-शराबा रहता हो, वहां भी पूजा स्थल नहीं बनाना चाहिए।

मूर्तियां रखते समय इन बातों का रखें ध्यान
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर में बहुत अधिक मूर्तियां या तस्वीरें नहीं रखनी चाहिए। विशेष रूप से एक ही देवी-देवता की कई मूर्तियां या तस्वीरें रखने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इससे पूजा स्थल की ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही मंदिर में कभी भी टूटी हुई मूर्ति या खंडित तस्वीर नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। पूजा स्थल की नियमित सफाई करना और उसे व्यवस्थित रखना भी बेहद जरूरी बताया गया है। साफ-सुथरा और शांत पूजा घर घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

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Aniket Prajapati अनिकेत प्रजापति UP News Network असिस्टेंट न्यूज़ एडिटर है। वे 2 साल से ज्योतिष और धार्मिक, बिजनेस, नेशनल, उत्तर प्रदेश, गैजेट्स, हेल्थ आदि से जुड़े मुद्दों को कवर कर रहे हैं। अनिकेत प्रजापति पिछले 1 साल से UP News Network, (Digital) के साथ जुड़े हैं। वह TV 24 Network में भी काम कर चुके हैं। अनिकेत प्रजापति ने भारतीय जनसंचार संस्थान Lucknow public College of professional studies से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है।