17 साल की उम्र में नक्सली बनना चाहते थे पवन कल्याण, कश्मीर में देखे थे अशांति के संकेत, बोले- अगर चिरंजीवी नहीं रोकते तो जिंदगी दूसरी होती
"मैं बंदूक उठाना चाहता था, नक्सली बनना चाहता था..." आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और टॉलीवुड सुपरस्टार पवन कल्याण का यह खुलासा हर किसी को चौंका रहा है। इसी बातचीत में पवन ने 1989 के कश्मीर का वह दर्दनाक किस्सा भी सुनाया, जब एक कश्मीरी पंडित ने उन्हें घाटी के बिगड़ते हालात की चेतावनी दी थी। आखिर उस मुलाकात में ऐसा क्या हुआ था जो आज भी पवन कल्याण नहीं भूल पाए हैं?
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और टॉलीवुड सुपरस्टार पवन कल्याण ने अपनी जिंदगी के ऐसे राज खोले हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उन्होंने बताया कि एक समय वह बंदूक उठाकर नक्सली आंदोलन का हिस्सा बनना चाहते थे, लेकिन बड़े भाई चिरंजीवी की एक सलाह ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। इसी बातचीत में उन्होंने कश्मीर के उन दिनों को भी याद किया, जब घाटी में अशांति के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे थे और एक कश्मीरी पंडित की पीड़ा ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया था।
धुरंधर और बारामूला से खुला यादों का पिटारा
न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में पवन कल्याण ने रणवीर सिंह स्टारर फिल्म 'धुरंधर' और कश्मीर की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म 'बारामूला' की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि 'बारामूला' सिर्फ एक हॉरर फिल्म नहीं है, बल्कि कहानी कहने का एक बेहद प्रभावशाली तरीका है। फिल्म देखते हुए उन्हें 1980 के दशक के आखिर में कश्मीर में बिताए अपने दिन याद आ गए, जब वह तेलुगू फिल्मों की शूटिंग के सिलसिले में घाटी जाया करते थे।
कश्मीर में पहली बार महसूस की थी बेचैनी
पवन कल्याण ने बताया कि 1987 से 1989 के बीच उन्होंने कश्मीर में कई गर्मियां बिताईं। उस समय वह शूटिंग यूनिट के साथ लॉजिस्टिक्स और खरीदारी जैसे काम देखते थे। इसी दौरान उन्हें घाटी में बदलते माहौल का एहसास हुआ। उन्होंने कहा कि एक दिन एक स्थानीय कश्मीरी पंडित ने उनसे कहा था कि हालात लगातार खराब हो रहे हैं और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या होगा। यह बातचीत आज भी उनकी यादों में ताजा है। पवन कल्याण ने कहा कि उस व्यक्ति के चेहरे पर डर साफ दिखाई देता था। वह अपने भविष्य को लेकर चिंतित था और उसे लग रहा था कि हालात किसी बड़े संकट की ओर बढ़ रहे हैं। पवन कल्याण के मुताबिक, उस समय उन्होंने घाटी में बढ़ते तनाव और समाज के भीतर पनप रही दूरी को महसूस किया था। बाद में जब कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ तो उन्हें उस व्यक्ति की बातें बार-बार याद आईं।
जब बंदूक उठाना चाहते थे पवन कल्याण
इंटरव्यू के दौरान पवन कल्याण ने अपनी युवावस्था का एक ऐसा किस्सा भी साझा किया, जिसने सभी को चौंका दिया। उन्होंने बताया कि 17 से 21 साल की उम्र के बीच वह समाज में दिख रहे अन्याय और असमानता से बेहद परेशान रहते थे। उस दौर में उनके मन में नक्सली आंदोलन से जुड़ने का विचार भी आया था। वह मानते हैं कि अगर हालात थोड़े अलग होते तो शायद वह उस रास्ते पर भी जा सकते थे।
चिरंजीवी की एक बात ने बदल दी जिंदगी
पवन कल्याण ने बताया कि जब उनके बड़े भाई और दक्षिण भारतीय सिनेमा के मेगास्टार चिरंजीवी को इस बारे में पता चला तो उन्होंने उनसे एक सवाल पूछा। चिरंजीवी ने कहा कि अगर परिवार की जिम्मेदारी तुम्हारे कंधों पर होती और कई लोगों की जिंदगी तुम्हारी कमाई पर निर्भर होती, तब भी क्या तुम यही फैसला लेते? पवन कहते हैं कि इस सवाल का उनके पास कोई जवाब नहीं था। वह चुप रह गए और यहीं से उनकी सोच बदलने लगी। पवन कल्याण ने कहा कि आज भी उनके जीवन के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत चिरंजीवी ही हैं। उन्होंने कहा कि जब भी वह अपने बड़े भाई के साथ खड़े होते हैं तो भूल जाते हैं कि वह खुद भी एक सुपरस्टार हैं। उनके मुताबिक, जीवन के सबसे कठिन दौर में चिरंजीवी ने सिर्फ भाई नहीं बल्कि एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई।
फिल्मों से लेकर राजनीति तक सक्रिय हैं पवन
एक तरफ पवन कल्याण आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर फिल्मों में भी लगातार नजर आ रहे हैं। हाल के वर्षों में वह हरि हरा वीरा मल्लू, दे कॉल हिम ओजी और उस्ताद भगत सिंह जैसी फिल्मों में दिखाई दिए हैं।
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