पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम बढ़ाएंगे महंगाई… दूध, दाल, फल समेत रोजमर्रा की चीजें हो सकती हैं महंगी!
Petrol Price Hike: क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर आने वाले महीनों में महंगाई पर पड़ सकता है। परिवहन लागत बढ़ने से दूध, दाल, फल, चाय-कॉफी समेत कई जरूरी वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कमजोर मानसून भी चिंता बढ़ा रहे हैं।
देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें आने वाले समय में आम लोगों की जेब पर और ज्यादा बोझ डाल सकती हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ईंधन महंगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक 15 मई के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो यह बढ़ोतरी निकट भविष्य में 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। इससे महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका है।
ईंधन महंगा तो बढ़ेगी ढुलाई लागत
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर सड़क परिवहन पर पड़ेगा। सड़क मार्ग से माल ढुलाई की लागत का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर निर्भर करता है। भारत में करीब 71 प्रतिशत माल की ढुलाई सड़क मार्ग से होती है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल महंगे होने पर सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का खर्च बढ़ जाएगा। रिपोर्ट का अनुमान है कि 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई दर में करीब 0.36 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। यदि कीमतें 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ती हैं तो महंगाई में लगभग 0.48 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है।
दूध, दाल और फलों की कीमतों पर पड़ सकता है असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती ढुलाई लागत का असर सबसे पहले खाद्य उत्पादों पर दिखाई दे सकता है। दूध, फल, दालें, चाय, कॉफी, मसाले, अंडे, मांस और मछली जैसे उत्पाद महंगे हो सकते हैं क्योंकि इनकी आपूर्ति बड़े परिवहन नेटवर्क पर निर्भर करती है। इसके अलावा कपड़ा, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, लकड़ी उत्पाद, सीमेंट, सिरेमिक, रसायन, कोयला और धातु उद्योगों की लागत भी बढ़ सकती है। कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं या उत्पादों की मात्रा कम कर सकती हैं।
कच्चे तेल और कमजोर मानसून से भी चिंता
क्रिसिल के अनुसार चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में कच्चे तेल की औसत कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल रही है, जबकि पूरे वर्ष के लिए अनुमान 95 डॉलर प्रति बैरल का था। हालांकि सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में की गई कटौती से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन यह बढ़ती ऊर्जा लागत की भरपाई पूरी तरह नहीं कर पाएगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। साथ ही कमजोर मानसून और अल नीनो जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियां भी खाद्य महंगाई को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में महंगाई का मुद्दा आम लोगों और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण बना रह सकता है।
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