'दो भागों में बंट चुकी है बीजेपी', शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने किया बड़ा दावा, बोले- मुगल और अंग्रेजों के समय भी नहीं हुआ था शंकराचार्य का ऐसा अपमान
क्या सचमुच बीजेपी अब दो अलग-अलग विचारधाराओं में बंट चुकी है? आगरा में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कुछ ऐसे सवाल उठाए, जिन्होंने राजनीति और धर्म दोनों के गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने शंकराचार्यों के सम्मान, गौ-संरक्षण और मौजूदा राजनीतिक सोच को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्यों के साथ ऐसा व्यवहार मुगल और अंग्रेजों के दौर में भी नहीं हुआ था। आखिर उनके निशाने पर कौन है और उनके बयान के पीछे की पूरी वजह क्या है, पूरी खबर पढ़ें...
आगरा में रविवार को उस समय राजनीतिक और धार्मिक दोनों हलकों में चर्चा तेज हो गई, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भाजपा, गौ-संरक्षण और संतों के सम्मान को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भाजपा अब एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग सोच वाली भाजपा बन चुकी है। एक भाजपा गाय और संतों का सम्मान करती है, जबकि दूसरी ऐसा करने को तैयार नहीं दिखती।
गविष्टि यात्रा के दौरान साधा निशाना
गो-संरक्षण और जनजागरण के उद्देश्य से निकाली जा रही गविष्टि यात्रा रविवार को आगरा पहुंची। राजपुर चुंगी स्थित परशुराम मंदिर पार्क में आयोजित सभा में शंकराचार्य ने कहा कि उनकी यात्रा किसी राजनीतिक दल को सत्ता से हटाने या किसी दूसरी पार्टी को स्थापित करने के लिए नहीं है। उनका मकसद केवल इतना है कि देश में गाय को माता का दर्जा मिले और सरकारें अपने वादों को निभाएं।
'हम कंधा बदलने नहीं, सोच बदलने निकले हैं'
सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे केवल सत्ता परिवर्तन की राजनीति नहीं कर रहे हैं। उनका कहना था कि देश में दशकों से गौ-संरक्षण के नाम पर वादे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीन पर अपेक्षित परिणाम नहीं दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी गाय को लेकर किए गए बड़े वादे अधूरे हैं और इसी मुद्दे पर लोगों को जागरूक करने के लिए वे यात्रा कर रहे हैं।
भाजपा पर दोहरी सोच का आरोप
शंकराचार्य ने कहा कि भाजपा के भीतर भी दो तरह की विचारधाराएं दिखाई देती हैं। उनके मुताबिक एक वर्ग गाय को माता मानता है और संतों का सम्मान करता है, जबकि दूसरा वर्ग इन मुद्दों को उतनी गंभीरता से नहीं लेता। उन्होंने कहा कि जो लोग गौमाता और संतों का सम्मान करेंगे, उनका समर्थन किया जाएगा और जो इसके विपरीत जाएंगे, उनका विरोध होगा।
नेताओं के लिए रखी गाय परीक्षा
अपने संबोधन में उन्होंने देश के राजनीतिक दलों और नेताओं के सामने एक तरह की परीक्षा भी रख दी। उन्होंने कहा कि जो नेता और राजनीतिक दल सार्वजनिक रूप से गाय को माता घोषित करेंगे, उन्हें इस परीक्षा में सफल माना जाएगा। जो सरकार में हैं, वे सरकारी स्तर पर फैसला लें और जो विपक्ष में हैं, वे अपनी पार्टी में प्रस्ताव पारित करें।
एकनाथ शिंदे का लिया नाम
शंकराचार्य ने दावा किया कि अब तक इस परीक्षा में केवल एक नेता सफल हुए हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से गाय को माता कहा है। उनके अनुसार अभी तक किसी अन्य बड़े नेता या दल ने इस दिशा में स्पष्ट कदम नहीं उठाया है। वहीं हाल ही में सैफई दौरे को लेकर उठी चर्चाओं पर भी उन्होंने अपनी बात रखी। शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने सैफई परिवार को व्यक्तिगत रूप से आशीर्वाद दिया था, लेकिन किसी राजनीतिक दल को समर्थन देने का सवाल तभी उठेगा, जब वह दल गाय को माता मानने संबंधी स्पष्ट प्रस्ताव पारित करेगा।
'शंकराचार्यों का ऐसा अपमान पहले कभी नहीं हुआ'
अपने संबोधन के दौरान शंकराचार्य ने बिना नाम लिए कहा कि अहंकार में डूबा एक व्यक्ति शंकराचार्यों का अपमान कर रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास में मुगल शासकों और अंग्रेजों के दौर में भी शंकराचार्यों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं हुआ था। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किस व्यक्ति की ओर था। हालांकि शंकराचार्य ने आगे कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति या दल से नहीं है। वहीं सीएम योगी को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी गाय को माता घोषित करने की दिशा में कदम उठाते हैं, तो वे उनकी भी खुलकर प्रशंसा करेंगे। उनका कहना था कि वे किसी के खिलाफ माहौल नहीं बना रहे, बल्कि सभी को अवसर दे रहे हैं।
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