संभल में जामा मस्जिद के शाही इमाम पर 6.94 करोड़ का जुर्माना, सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
संभल में जामा मस्जिद के शाही इमाम और उनके भाई पर ग्राम समाज की जमीन पर अवैध निर्माण के आरोप में कोर्ट ने 6.94 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है और जमीन खाली करने का आदेश दिया है।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के शाही इमाम पर गंभीर आरोप लगे हैं। सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण के मामले में तहसीलदार कोर्ट ने शाही इमाम मौलाना आफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन पर करीब 6.94 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। प्रशासन का कहना है कि ग्राम समाज की जमीन पर मस्जिद, दरगाह और मकान बनाए गए हैं। अदालत ने कब्जाधारियों को जमीन खाली करने का आदेश भी दिया है। इस आदेश के बाद इलाके में हलचल मच गई है और प्रशासन ने साफ किया है कि यदि तय समय में जमीन खाली नहीं की गई तो आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ग्राम समाज की जमीन पर निर्माण का आरोप
प्रशासन के अनुसार यह मामला गांव सैफ खां सराय से जुड़ा है। राजस्व रिकॉर्ड में इस जमीन को ग्राम समाज की जमीन बताया गया है, जिसे पौधारोपण के लिए आरक्षित किया गया था। स्थानीय लेखपाल की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग 1340 वर्ग मीटर जमीन पर मकान, मस्जिद और दरगाह का निर्माण किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि इन निर्माणों पर शाही इमाम मौलाना आफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन का कब्जा है। बताया जा रहा है कि यह निर्माण कई दशक पहले किया गया था और लंबे समय से यहां उनका परिवार रह रहा है।
कोर्ट ने दिया जमीन खाली करने का आदेश
मामले की जांच के बाद तहसीलदार की अदालत ने दोनों भाइयों को जमीन खाली करने का निर्देश दिया है। साथ ही करीब 6.94 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। प्रशासन के मुताबिक कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित पक्ष को 30 दिन का समय दिया गया है। अगर इस अवधि के भीतर जमीन खाली नहीं की जाती है तो राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन कब्जा हटाने की कार्रवाई करेगा। ऐसी स्थिति में मस्जिद, मकान और दरगाह पर बुलडोजर चलाया जा सकता है।
इमाम पक्ष ने जमीन को बताया वक्फ संपत्ति
सुनवाई के दौरान शाही इमाम मौलाना आफताब हुसैन वारसी ने अदालत में अपना पक्ष भी रखा। उन्होंने कहा कि यह जमीन वक्फ संपत्ति है और यहां मस्जिद तथा मजार का निर्माण कई साल पहले किया गया था। इमाम पक्ष का कहना है कि यह परिसर वक्फ बोर्ड में दर्ज है और यहां होने वाले धार्मिक कार्यक्रम प्रशासन की जानकारी में आयोजित होते रहे हैं। हालांकि राजस्व विभाग का कहना है कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह जमीन ग्राम समाज की है और उस पर किया गया निर्माण वैध नहीं माना जा सकता।
अवैध निर्माण के खिलाफ चल रहा अभियान
इस मामले के सामने आने के बाद जिले में सरकारी जमीनों पर कब्जे को लेकर प्रशासन की सख्ती भी चर्चा में है। संभल जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार सलेमपुर सालार, राया बुजुर्ग और नरौली जैसे क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए अब तक करीब 17 मस्जिदें, 12 मजारें और दो मदरसों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। इसके अलावा कुछ अन्य स्थानों पर भी नोटिस जारी किए गए हैं और आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
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