NDA में शुरू हुई सीटों की खींचतान, यूपी में राजभर-निषाद ने बढ़ाई बीजेपी की टेंशन, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद चर्चाएं तेज
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले एनडीए में सीटों की राजनीति गरमाने लगी है। अमित शाह से मुलाकात में ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद ने न सिर्फ अपनी जीती हुई सीटों पर दावा ठोका, बल्कि उन मुस्लिम-यादव बहुल सीटों की भी मांग कर दी जहां भाजपा को मुश्किलें आती रही हैं। पीएम मोदी की झालमुड़ी कूटनीति और सहयोगी दलों की बढ़ती दावेदारी के बीच जानिए यूपी में बदलते चुनावी समीकरणों की पूरी कहानी...
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी भले ही दूर हों, लेकिन एनडीए के भीतर सीटों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार 12 वर्ष प्रधानमंत्री रहने के अवसर पर आयोजित एनडीए की बैठक के बाद सहयोगी दलों ने अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराना शुरू कर दिया है। बैठक के तुरंत बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सीट बंटवारे को लेकर अपनी दावेदारी पेश कर दी।
हारी हुए सीटों को देने की उठाई मांग
सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं ने अमित शाह से साफ कहा कि वर्ष 2022 में जिन सीटों पर उनकी पार्टियों ने जीत हासिल की थी, वे सीटें आगामी विधानसभा चुनाव में भी उनके हिस्से में रहनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने उन सीटों पर भी दावा ठोक दिया जहां भाजपा दूसरे स्थान पर रही थी। खासतौर पर मुस्लिम और यादव बहुल सीटों को लेकर दोनों दलों ने अलग रणनीति पेश की है। उनका तर्क है कि जिन क्षेत्रों में भाजपा को सामाजिक समीकरणों के कारण कठिनाई होती है, वहां उनके दल अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं। गृह मंत्री के साथ हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने दावा किया कि पूर्वांचल और कुछ अन्य इलाकों में उनकी जातीय और सामाजिक पकड़ भाजपा से अधिक मजबूत है। उनका कहना है कि यदि गठबंधन उन्हें ऐसी सीटें देता है जहां भाजपा को परंपरागत रूप से चुनौती मिलती रही है, तो वे वहां जीत दर्ज कर एनडीए की सीटों का आंकड़ा बढ़ा सकते हैं।
निषाद पार्टी के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती
संजय निषाद की सक्रियता के पीछे हालिया राजनीतिक घटनाक्रम को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव 2024 में मझवां से विधायक रहे डॉ. विनोद बिंद भाजपा के टिकट पर भदोही से सांसद चुने गए। इसके बाद खाली हुई मझवां सीट के उपचुनाव में भाजपा ने निषाद पार्टी को मौका देने के बजाय अपना उम्मीदवार उतार दिया। इस घटनाक्रम के बाद निषाद पार्टी की विधानसभा में ताकत और सीमित हो गई और अब उसके पास अपने सिंबल पर केवल पांच विधायक ही बचे हैं। ऐसे में आगामी चुनाव से पहले ज्यादा सीटों की मांग पार्टी के राजनीतिक भविष्य से भी जुड़ी मानी जा रही है।
सहयोगी दलों के नेताओं संग पीएम ने खाई झालमुड़ी
एनडीए बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर और चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेजी से फैल रही है। बैठक समाप्त होने के बाद पीएम मोदी ने संजय निषाद और ओमप्रकाश राजभर को अपने हाथों से झालमुड़ी खिलाई और दोनों नेताओं से लंबे समय तक बातचीत की। राजनीतिक विश्लेषक इसे महज औपचारिक मुलाकात नहीं मान रहे, बल्कि इसे यूपी चुनाव से पहले सहयोगी दलों को साधने और गठबंधन को मजबूत संदेश देने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
सबका साथ-सबका विकास का पीएम मोदी ने दिया मंत्र
बैठक के बाद संजय निषाद ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सभी सहयोगी दलों से एकजुट होकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश था कि यदि एनडीए के सभी घटक दल एकजुट रहेंगे तो सबका साथ, सबका विकास का लक्ष्य और अधिक मजबूती से आगे बढ़ेगा। इससे यह संकेत भी मिला कि भाजपा यूपी में सहयोगी दलों को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें साथ लेकर चुनावी रणनीति तैयार करना चाहती है।
सीटों को लेकर क्या कहते हैं चुनावी नतीजे ?
ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा ने 2022 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 6 सीटों पर जीत हासिल की थी। बाद में राजभर एनडीए में शामिल हो गए। वहीं निषाद पार्टी को भाजपा गठबंधन में 16 सीटें मिली थीं। इनमें से 10 सीटों पर पार्टी अपने चुनाव चिह्न पर उतरी थी और 6 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाले उसके 5 उम्मीदवार भी विजयी रहे थे। यही प्रदर्शन अब दोनों दलों को अधिक सीटों की मांग करने का राजनीतिक आधार दे रहा है।
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