राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के आरोपों पर PMO का सख्त रुख, क्या मामले की होगी CBI जांच ? भाजपा नेता ने लेटर लिखकर की थी मांग
राम मंदिर के चढ़ावे में 7 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी के आरोप अब सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गए हैं। भाजपा नेता की शिकायत के बाद PMO ने ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगी है, जबकि CBI जांच की मांग भी तेज हो गई है। आखिर आरोपों में कितना दम है, ट्रस्ट ने क्या सफाई दी है और आगे क्या हो सकता है? जानिए पूरी मामला...
अयोध्या के राम मंदिर में आए चढ़ावे को लेकर उठे सवाल अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर के चढ़ावे में 7 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद PMO ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगी है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्ष लगातार सरकार और ट्रस्ट से जवाब मांग रहा है और मंदिर ट्रस्ट किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार कर रहा है।
भाजपा नेता की चिट्ठी ने गरमाया माहौल
दरअसल इस मामले ने तब नया मोड़ लिया, जब अयोध्या के भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे और दान से जुड़े किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे।
बंद कमरे में 4 घंटे चली ट्रस्ट की बैठक
इधर, राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंगलवार को ट्रस्ट के सदस्यों के साथ अहम बैठक की। राम मंदिर परिसर के एक बंद कमरे में करीब चार घंटे तक चली इस बैठक में चढ़ावे की राशि, उसके उपयोग, लेखा-जोखा और ऑडिट व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई। हालांकि बैठक के बाद ट्रस्ट की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया।
चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों पर अखिलेश ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बार फिर इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार और ट्रस्ट से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि अगर सब कुछ पारदर्शी है तो चढ़ावे से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा। अखिलेश ने पूछा कि आखिर देश की सनातन आस्था से जुड़े इस मामले में सच्चाई सामने लाने में देरी क्यों हो रही है और कथित गड़बड़ी करने वालों को कौन बचा रहा है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
दरअसल, पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब सपा सरकार में मंत्री रहे पवन पांडेय ने दावा किया कि राम मंदिर के चढ़ावे में 5 करोड़ से लेकर साढ़े 7 करोड़ रुपये तक की चोरी हुई है। इसके बाद यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। हालांकि आरोपों के समर्थन में अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। वहीं आरोपों के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया कि मंदिर के वित्तीय प्रबंधन की नियमित आंतरिक ऑडिट होती है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में समय-समय पर ऑडिट कराया जाता है और अब तक किसी तरह की गड़बड़ी सामने नहीं आई है। ट्रस्ट का कहना है कि पूरे सिस्टम में कई स्तरों पर निगरानी की व्यवस्था मौजूद है।
आखिर कैसे होती है चढ़ावे की गिनती?
राम मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की गिनती बैंक कर्मचारियों द्वारा ट्रस्ट प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की जाती है। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है। गिनती के बाद रकम को रिकॉर्ड में दर्ज कर मंदिर परिसर में बने सुरक्षित लॉकर में रखा जाता है और फिर अगले दिन बैंक खाते में जमा कराया जाता है। ट्रस्ट के अनुसार, चढ़ावे और वित्तीय लेन-देन की निगरानी के लिए तकनीकी और ऑडिट व्यवस्था भी बनाई गई है। दान और खर्च से जुड़े रिकॉर्ड का परीक्षण नियमित रूप से किया जाता है। मंदिर के खातों और वित्तीय गतिविधियों पर कई स्तरों पर निगरानी रखी जाती है।
राम मंदिर को अब तक कितना चढ़ावा मिला?
दिसंबर 2025 में हुई ट्रस्ट की बैठक में बताया गया था कि मंदिर को अब तक कुल 4,575 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इनमें श्रद्धालुओं के दान, चढ़ावे और अन्य स्रोतों से आई रकम शामिल है। ट्रस्ट के अनुसार, पिछले लगभग छह वर्षों में मंदिर निर्माण, परिसर विस्तार, भूमि खरीद और अन्य विकास कार्यों पर करीब 2,475 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग दान और सहयोग कर रहे हैं। यही वजह है कि मंदिर का चढ़ावा और वित्तीय प्रबंधन हमेशा चर्चा का विषय बना रहता है। ऐसे में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों ने करोड़ों श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
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