"बेटी की खुशी सबसे बड़ी" 6 घंटे की पुलिस पंचायत के बाद पिता ने दी मंजूरी, प्रतापगढ़ में 300 मीटर की दूरी से शुरू हुई मोहब्बत को थाने में मिली मंजिल
प्रतापगढ़ में चार साल पुराने प्रेम संबंध का ऐसा अंत हुआ जिसकी पूरे इलाके में चर्चा है। छह घंटे तक थाने में चली पुलिस पंचायत, पिता की सहमति और फिर मंदिर में हुई सानिया-अमन की शादी। आखिर कैसे बदला परिवार का फैसला और क्या हुआ थाने में?
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में एक प्रेम कहानी का अंत किसी विवाद या अदालत के आदेश से नहीं, बल्कि परिवार की सहमति और पुलिस की समझाइश के साथ हुआ। पट्टी कोतवाली क्षेत्र के दाऊदपुर गांव में रहने वाले सानिया बानो और अमन कुमार ने करीब चार साल पुराने रिश्ते को आखिरकार शादी में बदल दिया। इस विवाह तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था। छह घंटे तक थाने में चली बातचीत, परिवारों के बीच लंबे मंथन और आखिर में पिता के बदले फैसले ने इस कहानी को पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया।
300 मीटर की दूरी... और चार साल की मोहब्बत
दाऊदपुर गांव में सानिया और अमन के घरों के बीच महज 300 मीटर की दूरी है। इसी नजदीकी ने दोनों को करीब लाया और धीरे-धीरे दोस्ती प्रेम में बदल गई। पिछले चार वर्षों से दोनों एक-दूसरे को जानते थे और साथ जीवन बिताने का फैसला कर चुके थे। हालांकि, जब इस रिश्ते की जानकारी युवती के परिजनों को मिली तो परिवार ने इसका कड़ा विरोध किया। शनिवार को युवती के पिता खुर्शीद आलम ने पट्टी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। मामला अंतरधार्मिक विवाह से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल दोनों पक्षों को थाने बुला लिया। शुरुआत में माहौल तनावपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने किसी जल्दबाजी की जगह बातचीत का रास्ता चुना।
6 घंटे तक चली पुलिस पंचायत
थाने में करीब छह घंटे तक दोनों परिवारों के बीच बातचीत का दौर चलता रहा। पुलिस अधिकारियों ने धैर्यपूर्वक दोनों पक्षों को समझाया और युवती की इच्छा को भी महत्व दिया। लंबी चर्चा के बाद दोपहर करीब चार बजे वह पल आया, जब पिता खुर्शीद आलम ने अपनी बेटी की खुशी को सबसे ऊपर रखते हुए विवाह के लिए सहमति दे दी। उनके इस फैसले के बाद थाने का तनावपूर्ण माहौल राहत और खुशी में बदल गया। पिता की सहमति मिलने के बाद सानिया और अमन का विवाह पूरे विधि-विधान के साथ एक मंदिर में संपन्न कराया गया। दोनों ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया और परिवार के बड़ों का आशीर्वाद भी लिया। शादी के दौरान दोनों ने जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया।
हलफनामे में पहले ही जताई थी अपनी इच्छा
किसी भी तरह के कानूनी विवाद से बचने के लिए दोनों ने पहले ही नोटरी के समक्ष विवाह संबंधी हलफनामा तैयार कराया था। इसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से विवाह कर रहे हैं। दस्तावेज में यह भी दर्ज किया गया कि इस फैसले पर किसी तरह का दबाव नहीं है। इस विवाह में गांव के खुर्शीद आलम और अमर बहादुर गवाह बने। शादी के बाद यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। कोई इसे प्यार की जीत बता रहा है तो कोई परिवार की समझदारी और सामाजिक सौहार्द का उदाहरण मान रहा है।
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