उल्टे हाथ से काम करने की आदत बना सकती है दिमाग को तेज, एक्सपर्ट्स ने बताए फायदे
विशेषज्ञों का कहना है कि दैनिक कार्यों के लिए अपने गैर-प्रमुख हाथ का उपयोग करने से स्मृति, एकाग्रता और मस्तिष्क की गतिविधि में वृद्धि हो सकती है, साथ ही संज्ञानात्मक गिरावट को रोकने में मदद मिल सकती है।
दैनिक जीवन में हम ज्यादातर काम अपने सीधे हाथ से करते हैं, इसलिए वही काम हमें आसान लगता है। लेकिन जब वही काम उल्टे हाथ से करने की कोशिश की जाती है, तो दिमाग तुरंत अलर्ट हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर को फिट रखने के साथ-साथ दिमाग को भी सक्रिय रखना बहुत जरूरी है। अगर हम रोज एक ही तरह का काम करते रहें तो शरीर और दिमाग दोनों ऑटोपायलट मोड में काम करने लगते हैं। ऐसे में छोटी-छोटी नई चुनौतियां दिमाग के लिए एक्सरसाइज की तरह काम करती हैं और मानसिक सक्रियता बढ़ाने में मदद करती हैं।
उल्टे हाथ से काम करने से बनते हैं नए ब्रेन कनेक्शन
विशेषज्ञ बताते हैं कि अपना नाम उल्टे हाथ से लिखना या कोई छोटा काम दूसरे हाथ से करना शुरू में थोड़ा अजीब लगता है। लेकिन यही अभ्यास दिमाग के लिए एक तरह की ट्रेनिंग बन जाता है। इस तरह के अभ्यास से दिमाग में नए कनेक्शन बनते हैं, जिससे फोकस बढ़ता है और याददाश्त भी बेहतर होती है। धीरे-धीरे सोचने और समझने की गति भी तेज हो सकती है। यही वजह है कि कई एक्सपर्ट दिमाग को एक्टिव रखने के लिए इस तरह की छोटी-छोटी गतिविधियों की सलाह देते हैं।
रोजमर्रा की गतिविधियां भी बन सकती हैं दिमागी एक्सरसाइज
मेमोरी को मजबूत करने के लिए किसी बड़े इंतजाम की जरूरत नहीं होती। आप रोजमर्रा की कुछ सामान्य गतिविधियों को ही दिमाग की एक्सरसाइज बना सकते हैं। जैसे विकेट पर निशाना लगाना, डार्ट खेलना, उल्टे हाथ से लिखना या कंप्यूटर का माउस दूसरे हाथ से चलाना। इन गतिविधियों से दिमाग को नया अनुभव मिलता है और वह ज्यादा सक्रिय रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल कई लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, कम चलते-फिरते हैं और घंटों स्क्रीन देखते रहते हैं। यह सेडेंटरी लाइफस्टाइल धीरे-धीरे शरीर और दिमाग दोनों की सक्रियता को कम कर देता है।
शरीर और दिमाग को ऐसे रखें एक्टिव
खेल, मूवमेंट, फोकस और हाथ-आंख के तालमेल से जुड़ी गतिविधियां दिमाग को तरोताजा रखने में मदद करती हैं। जब शरीर सक्रिय रहता है तो दिमाग भी ज्यादा बेहतर तरीके से काम करता है। रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों को अलग तरीके से करने से दिमाग को नई चुनौती मिलती है और उसकी क्षमता बढ़ती है।
लाइफस्टाइल में बदलाव है जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी याददाश्त और मानसिक क्षमता को बेहतर बनाना चाहता है, तो उसे अपने जीवन में कुछ बदलाव करने चाहिए। रूटीन में छोटे-छोटे बदलाव दिमाग को नई चुनौतियां देते हैं। इससे भूलने की समस्या का खतरा कम हो सकता है और गंभीर बीमारियों जैसे मनोभ्रंश और अल्जाइमर रोग से बचाव में भी मदद मिल सकती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
