इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को धरती पर गिराएगा नासा, 9500 करोड़ रुपए होगा खर्च, जानिए 25 साल बाद क्यों खत्म होगी अंतरिक्ष की सबसे बड़ी प्रयोगशाला ?
25 साल तक अंतरिक्ष में वैज्ञानिक खोजों का केंद्र रहा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है। NASA ने 9500 करोड़ रुपए की योजना बनाकर इसे 2030 तक पृथ्वी पर गिराने का फैसला किया है। आखिर क्यों अंतरिक्ष के इस तैरते शहर को समुद्र में गिराया जाएगा और इसके बाद अंतरिक्ष की दुनिया में क्या बदलने वाला है?
पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर पिछले 25 वर्षों से लगातार इंसानी मौजूदगी का गवाह बना इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। कभी अंतरिक्ष विज्ञान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाने वाला यह स्टेशन आने वाले कुछ वर्षों में इतिहास का हिस्सा बन जाएगा। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने इसकी विदाई की योजना सार्वजनिक कर दी है, जिसके तहत 2030 तक ISS को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में उतारा जाएगा।
9500 करोड़ रुपए होंगे खर्च
ISS को बंद करना उतना आसान नहीं है, जितना किसी इमारत को गिराना। करीब 4.5 लाख किलोग्राम वजनी यह स्टेशन फुटबॉल मैदान से भी बड़ा है और पिछले ढाई दशक से लगातार पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है। NASA ने इसके सुरक्षित अंत के लिए करीब 1 अरब डॉलर यानी लगभग 9500 करोड़ रुपए का विशेष मिशन तैयार किया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि स्टेशन का कोई बड़ा हिस्सा आबादी वाले इलाके में न गिरे।
आखिर क्यों रिटायर किया जा रहा है ISS?
ISS अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर चुका है। पिछले कुछ वर्षों में स्टेशन में तकनीकी खामियां बढ़ी हैं और इसके रखरखाव पर हर साल अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं। NASA अब अपने संसाधनों और बजट को चंद्रमा तथा मंगल मिशनों की ओर मोड़ना चाहता है। ऐसे में दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला को सम्मानजनक विदाई देने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
अंतरिक्ष से धरती तक कैसे पहुंचेगा ISS?
NASA की योजना के अनुसार 2028 से स्टेशन को उसकी वर्तमान कक्षा में बनाए रखने की प्रक्रिया धीरे-धीरे बंद की जाएगी। इसके बाद एक विशेष अंतरिक्ष यान ISS को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल की ओर धकेलेगा। वायुमंडल में प्रवेश करते ही घर्षण के कारण इसका अधिकांश हिस्सा जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि कुछ बड़े टुकड़े बच सकते हैं, इसलिए इनके गिरने के लिए पहले से सुरक्षित स्थान तय किया गया है।
दुनिया का सबसे सुनसान इलाका बनेगा अंतिम ठिकाना
ISS के बचे हुए हिस्सों को दक्षिण प्रशांत महासागर के एक बेहद दूरस्थ क्षेत्र में गिराया जाएगा, जिसे पॉइंट नीमो कहा जाता है। यह पृथ्वी का ऐसा स्थान माना जाता है जो किसी भी आबादी वाले क्षेत्र से सबसे अधिक दूर है। दशकों से पुराने उपग्रहों, स्पेस स्टेशन और अंतरिक्ष मलबे को यहीं गिराया जाता रहा है। 1971 से अब तक करीब 300 अंतरिक्षीय संरचनाओं को इसी क्षेत्र में नष्ट किया जा चुका है।
250 से ज्यादा अंतरिक्ष यात्रियों ने बिताया समय
ISS सिर्फ एक प्रयोगशाला नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में बना एक चलता-फिरता घर रहा है। यहां एक समय में 6 से 8 अंतरिक्ष यात्री महीनों तक रह सकते हैं। वैज्ञानिक प्रयोगों, जैविक शोध, चिकित्सा अनुसंधान और अंतरिक्ष तकनीक के हजारों परीक्षण इसी स्टेशन पर किए गए हैं। अब तक 19 देशों के 250 से अधिक अंतरिक्ष यात्री ISS का दौरा कर चुके हैं।
अंतरिक्ष की शुरू हुई नई दौड़
ISS की विदाई के साथ ही अंतरिक्ष में एक नया दौर शुरू होने जा रहा है। अब सरकारों के साथ-साथ निजी कंपनियां भी अपने स्पेस स्टेशन तैयार कर रही हैं। अमेरिकी कंपनी एक्सिओम, ब्लू ओरिजिन और वोस्ट जैसे संस्थान नए कमर्शियल स्पेस स्टेशन विकसित कर रहे हैं। दूसरी ओर चीन पहले ही अपना स्वतंत्र स्पेस स्टेशन स्थापित कर चुका है।
भारत भी बना रहा अपना स्पेस स्टेशन
ISS के बाद अंतरिक्ष में भारत की भूमिका भी बढ़ने वाली है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) वर्ष 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। गगनयान मिशन की सफलता के बाद भारत भी उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल होना चाहता है, जिनके पास अंतरिक्ष में अपना स्थायी स्टेशन हो।
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