14 साल पहले मारा थप्पड़…उसकी वजह से अब उजाड़ा मेरठ का सेंट्रल मार्केट, स्कूल और अस्पताल भी हुए सील
Uttar Pradesh News: मेरठ के सेंट्रल मार्केट में प्रशासन ने अवैध निर्माण के खिलाफ सख्ती शुरू की। 44 संपत्तियों को सील करने का आदेश दिया गया। व्यापारी खुद अपनी दुकानों को गिराने लगे। मामले की शुरुआत 2012 में हुई थी, जब लोकेश खुराना ने अवैध निर्माण की शिकायत की थी।
Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ का सेंट्रल मार्केट, जो दशकों से व्यापार का बड़ा केंद्र रहा है, अब अवैध निर्माण और प्रशासन की सख्ती की वजह से चर्चा में है। बिना अनुमति चल रही दुकानों, स्कूलों और अन्य संस्थानों पर प्रशासन ने सीलिंग शुरू कर दी है। हालात ऐसे हैं कि जैसे ही एक इमारत पर बुलडोजर चला, कई लोगों ने खुद अपनी दुकानों को गिराना शुरू कर दिया। यह कार्रवाई उस समय शुरू हुई, जब एक अधिकारी को थप्पड़ मारने की घटना सामने आई। इस छोटी घटना ने पूरे मार्केट की अवैध निर्माण की कहानी सामने ला दी।
कार्रवाई की शुरुआत और जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत 2012 में हुई, जब आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने अवैध निर्माण की शिकायत की। आवास विकास विभाग की टीम भूखंड संख्या 661/6 पर जांच करने पहुंची थी। इसी दौरान एक व्यापारी ने विभाग के अधिकारी को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद खुराना ने पूरे सेंट्रल मार्केट के दस्तावेजों की जानकारी जुटानी शुरू की। जांच में पता चला कि मार्केट में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कर व्यापार चलाया जा रहा था। खुराना ने इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, एक-एक कर अवैध निर्माण सामने आने लगे। कई व्यापारी एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें करने लगे, जिससे मामला और जटिल हो गया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और 44 संपत्तियों की सीलिंग
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 44 संपत्तियों को सील करने का आदेश दिया। इनमें 6 अस्पताल, 5 स्कूल और कुछ बैंक भी शामिल हैं। हाई कोर्ट ने संबंधित विभाग से 9 अप्रैल तक जवाब मांगा है। इस आदेश के बाद सेंट्रल मार्केट में तनाव का माहौल है। व्यापारी और विपक्षी दलों के नेता सरकार पर निशाना साध रहे हैं।
भ्रष्टाचार उजागर करने का मकसद
लोकेश खुराना का मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार को उजागर करना था। लेकिन इस कार्रवाई की चपेट में व्यापारी और अधिकारी दोनों ही आए। अब वर्षों से चल रहा व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है और लोग अपनी दुकानों को खुद ही गिराने पर मजबूर हैं। प्रशासन का यह कदम अवैध निर्माण के खिलाफ सख्ती का प्रतीक माना जा रहा है।
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