20 साल से पढ़ा रहे मास्टर पर लगे संगीन आरोप, बिना जांच सस्पेंड, 6 दिन बाद सवेतन बहाली
मथुरा के एक प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को गंभीर आरोपों के बावजूद बिना किसी जांच के निलंबित कर दिया गया था, लेकिन जांच में दोषमुक्त पाए जाने के बाद उन्हें पूरे वेतन सहित बहाल कर दिया गया।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के नौहझील क्षेत्र के एक प्राइमरी स्कूल से जुड़ा मामला इन दिनों चर्चा में है। यहां करीब 20 साल से तैनात प्रधान अध्यापक जान मोहम्मद को गंभीर आरोपों के आधार पर अचानक निलंबित कर दिया गया था। बिना जांच के हुई इस कार्रवाई से स्कूल स्टाफ, गांव वाले और अभिभावक हैरान रह गए। बाद में तीन दिन की जांच हुई और 6 फरवरी को जान मोहम्मद को सवेतन बहाल कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की कार्यशैली और शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्कूल और स्टाफ की स्थिति
नौहझील के इस प्राइमरी स्कूल में कुल 235 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें 89 मुस्लिम हैं, जबकि बाकी हिंदू बच्चे हैं। स्कूल स्टाफ में कुल 8 कर्मचारी हैं, जिनमें से 7 हिंदू हैं। केवल प्रधान अध्यापक जान मोहम्मद ही गैर हिंदू हैं। गांव वालों के मुताबिक स्कूल में पढ़ाई सामान्य रूप से चल रही थी और पहले कभी किसी तरह की शिकायत सामने नहीं आई थी।
शिकायत और त्वरित निलंबन
30 जनवरी को भाजपा के युवा नेता और बाजना मंडल अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान ने मथुरा की बीएसए रतन कीर्ति से मुलाकात कर प्रधान अध्यापक के खिलाफ शिकायत की। आरोप लगाए गए कि वह बच्चों का ब्रेनवॉश करते हैं, इस्लाम को बेहतर बताते हैं, हिंदू धर्म को गलत कहते हैं, जबरन नमाज पढ़वाते हैं और राष्ट्रगान नहीं कराते। इन गंभीर आरोपों पर बीएसए ने बिना जांच के 31 जनवरी को जान मोहम्मद को निलंबित कर दिया और आदेश जारी हो गया।
गांव का विरोध और जांच
निलंबन की वजह सामने आते ही गांव में नाराजगी फैल गई। गांव वालों ने आरोपों को झूठा बताया और बीएसए कार्यालय तक विरोध दर्ज कराया। इसके बाद जांच टीम बनाई गई, जिसने तीन दिन तक स्कूल, बच्चों और स्टाफ से बात की। जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई और 6 फरवरी को जान मोहम्मद को सवेतन बहाल कर दिया गया। बच्चों और अभिभावकों ने भी सभी आरोपों को खारिज किया।
बीएसए के रवैये पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे बीएसए से मिलने पहुंचे तो उन्होंने बात सुनने के बजाय नाराजगी दिखाई। इसका वीडियो भी सामने आया है। लोगों का कहना है कि अगर शिकायत थी तो पहले जांच होनी चाहिए थी, न कि सीधे निलंबन जैसा बड़ा कदम उठाया जाना चाहिए था।
विवाद के पीछे बताई जा रही वजहें
स्थानीय लोगों के अनुसार विवाद के पीछे दो कारण बताए जा रहे हैं। पहला, स्कूल में बाउंड्री वॉल बनवाने को लेकर विवाद, जिससे कुछ लोगों को परेशानी थी। दूसरा, एसआईआर से जुड़े फॉर्म-7 को लेकर स्कूल की एक महिला शिक्षिका पर दबाव बनाने का मामला। इन दोनों वजहों के चलते कथित रूप से मनगढ़ंत शिकायत की गई। अब सवाल यह है कि झूठे और भ्रामक आरोप लगाने वालों पर कोई कार्रवाई होगी या नहीं।
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