राम मंदिर के बाद अब गाजी मियां दरगाह के चढ़ावे पर छिड़ा विवाद! करोड़ों के गबन के आरोप से मचा सियासी बवाल, योगी के मंत्री ने 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अब बहराइच की गाजी मियां दरगाह में करोड़ों के गबन के आरोपों ने नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। भाजपा नेता की शिकायत के बाद प्रभारी मंत्री ने डीएम से 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है। आखिर क्या हैं आरोप, किस पर उठी उंगलियां और क्यों सियासत गरमा गई?
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित गाजी मियां दरगाह को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। इस बार सवाल करोड़ों रुपये के चढ़ावे, दरगाह की संपत्तियों और उनकी आय के इस्तेमाल पर उठ रहे हैं। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि दरगाह में पिछले दो दशकों के दौरान बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने पूरे मामले की SIT से जांच कराने की मांग की है। शिकायत सामने आने के बाद प्रदेश सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और प्रशासन से जवाब तलब किया है।
शिकायत के बाद प्रभारी मंत्री ने मांगी रिपोर्ट
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब बहराइच के प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी से 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट मांग ली। मंत्री ने कहा कि उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि दरगाह में चढ़ावे, दुकानों के किराए, ठेकों, मेले और अन्य स्रोतों से आने वाली आय का सही हिसाब नहीं रखा जा रहा है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि किसी भी धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन का दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा।
20 साल में हजारों करोड़ के घोटाले का दावा
भाजपा नेता कुंवर बासित अली ने आरोप लगाया है कि दरगाह से जुड़े वक्फ नंबर-19 की संपत्तियों पर वर्षों से एक ही समूह का प्रभाव बना हुआ है। उनका दावा है कि समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री वकार शाह के परिवार से जुड़े लोग दरगाह की विभिन्न समितियों में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दरगाह की सालाना आय करीब 14 करोड़ रुपये दिखाई जाती है, जबकि वास्तविक आय इससे कहीं अधिक हो सकती है। बासित अली का दावा है कि यदि पिछले करीब 20 वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राम मंदिर का जिक्र कर अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना
कुंवर बासित अली ने इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देते हुए समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि धार्मिक स्थलों पर आने वाले चढ़ावे की पारदर्शिता की बात होती है तो केवल राम मंदिर ही नहीं, बल्कि अन्य धार्मिक संस्थानों की भी जांच होनी चाहिए। उनका आरोप था कि दरगाह की आय का उपयोग शिक्षा और गरीब मुस्लिम समुदाय के कल्याण में किया जा सकता था, लेकिन कथित भ्रष्टाचार के कारण ऐसा नहीं हो पाया।
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