सर, मुझे सब इंस्पेक्टर से कांस्टेबल बना दीजिए… दिल्ली पुलिसकर्मी की अजीब अर्जी से मचा हड़कंप
दिल्ली पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर ने पदोन्नति वापस लेकर दोबारा कांस्टेबल बनने की मांग की है। इस अनोखी अर्जी के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी इकाइयों से रिपोर्ट मांगी है।
Delhi News: दिल्ली पुलिस में इन दिनों एक अजीब मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। उत्तर पूर्वी जिले के एक पुलिस स्टेशन में तैनात एक सब इंस्पेक्टर ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को ऐसी अर्जी दी है, जिसे सुनकर पूरा पुलिस महकमा हैरान रह गया है। आमतौर पर पुलिसकर्मी पदोन्नति मिलने पर खुश होते हैं और आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस मामले में ठीक उल्टा देखने को मिला है। बताया जा रहा है कि संबंधित सब इंस्पेक्टर ने अपने अधिकारियों से अनुरोध किया है कि उसकी पदोन्नति वापस ले ली जाए और उसे फिर से कांस्टेबल बना दिया जाए। इस अनोखी मांग का पत्र अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।
कांस्टेबल से बने थे सब इंस्पेक्टर
सूत्रों के अनुसार यह पुलिसकर्मी पहले कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुआ था। बाद में विभागीय प्रक्रिया के तहत उसे पदोन्नति देकर सब इंस्पेक्टर बना दिया गया। आमतौर पर ऐसी पदोन्नति को बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन इस मामले में पुलिसकर्मी ने खुद ही पद छोड़ने की इच्छा जताई है। उसने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित रूप से अनुरोध किया है कि उसे दोबारा कांस्टेबल के पद पर वापस कर दिया जाए। इस तरह की मांग पुलिस विभाग में बहुत कम देखने को मिलती है, इसलिए यह मामला अधिकारियों के लिए भी उलझन का कारण बन गया है।
पुलिस मुख्यालय ने मांगी सभी इकाइयों से रिपोर्ट
इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय की पेंशन सेल ने सभी संबंधित इकाइयों को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि मामले की पूरी जानकारी जुटाकर रिपोर्ट भेजी जाए। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला काफी असामान्य है, इसलिए आगे की कार्रवाई से पहले सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। इसी वजह से पुलिस मुख्यालय ने दिल्ली के सभी जिलों और इकाइयों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
विभागीय मामलों की भी मांगी गई जानकारी
पेंशन सेल की ओर से भेजे गए पत्र में यह भी कहा गया है कि यह जानकारी दी जाए कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई विभागीय जांच, आपराधिक मामला या विजिलेंस जांच लंबित तो नहीं है। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि कहीं उसके खिलाफ निलंबन, शिकायत, ओवरपेमेंट, मेडिकल समस्या या अनुपस्थिति से जुड़ा कोई मामला तो लंबित नहीं है। साथ ही सभी इकाइयों से तीन दिनों के भीतर नो डिमांड सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने को कहा गया है। यदि तय समय के भीतर कोई जानकारी नहीं दी जाती है, तो इसे निल रिपोर्ट माना जाएगा और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस अनोखी मांग ने पूरे पुलिस विभाग में चर्चा का माहौल बना दिया है।
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