संभल में नमाजियों की संख्या सीमित करने पर हाई कोर्ट सख्त, कहा– कानून व्यवस्था नहीं संभाल सकते तो इस्तीफा दें
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं की जा सकती और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे संभल में रमजान के दौरान कानून व्यवस्था सुनिश्चित करें।
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में नमाज को लेकर चल रहे विवाद के बीच इलाहबाद उच्च न्यायालय ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि किसी मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों की संख्या को सीमित नहीं किया जा सकता। यदि अधिकारी कानून व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या अपना तबादला कहीं और करवा लेना चाहिए। कोर्ट की यह टिप्पणी संभल में रमजान के दौरान नमाज रोके जाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई।
कानून का राज बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि हर हाल में कानून का राज कायम रहे। अदालत ने साफ कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन को कानून व्यवस्था बिगड़ने का डर है और इसी वजह से वे पूजा स्थल के अंदर लोगों की संख्या सीमित करना चाहते हैं, तो यह उचित तरीका नहीं है। ऐसे में अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि हर समुदाय को अपने निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का अधिकार है और राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए।
20 नमाजियों को दी गई थी अनुमति
यह मामला शनिवार को अदालत में सुनवाई के लिए आया। याचिकाकर्ता मुनाजिर खान की ओर से अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। उन्होंने बताया कि गाटा संख्या 291 पर स्थित एक मस्जिद में रमजान के दौरान नमाज पढ़ने से उन्हें रोका जा रहा है।राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार गाटा संख्या 291 की जमीन Mohan Singh और Bhuraj Singh के नाम दर्ज है। प्रशासन की ओर से यहां केवल 20 नमाजियों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी।
दोनों पक्षों ने कोर्ट में रखे अपने तर्क
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि जिस परिसर में मस्जिद स्थित है, वहां 20 से ज्यादा लोग आसानी से नमाज अदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अभी रमजान का महीना चल रहा है और इस दौरान नमाज पढ़ने के लिए ज्यादा लोग आते हैं।वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए नमाजियों की संख्या सीमित करने का फैसला लिया गया था। प्रशासन को आशंका थी कि अधिक भीड़ होने से स्थिति बिगड़ सकती है।फिलहाल अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि पूजा स्थल पर नमाजियों की संख्या सीमित करना उचित नहीं है और प्रशासन को कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए लोगों को शांतिपूर्वक पूजा करने की अनुमति देनी चाहिए।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
