‘दिल में दुख हो तो संगम भी शांति नहीं देता’ बिना स्नान किए माघ मेले से लौटे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या विवाद के बाद प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया। उन्होंने प्रशासन के सम्मानजनक स्नान प्रस्ताव को ठुकराते हुए बिना संगम स्नान किए काशी प्रस्थान किया। मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां CBI जांच की मांग की गई है।

Jan 28, 2026 - 16:18
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‘दिल में दुख हो तो संगम भी शांति नहीं देता’ बिना स्नान किए माघ मेले से लौटे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

प्रयागराज। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया है। बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद वे बिना संगम स्नान किए काशी के लिए रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि उनका मन इतना व्यथित है कि पवित्र स्नान भी उन्हें शांति नहीं दे सकता। मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन से हुए विवाद के बाद उन्होंने माघ मेले में आगे किसी भी स्नान में शामिल न होने का फैसला किया है। शंकराचार्य ने कहा कि प्रयागराज आस्था और शांति की भूमि रही है, लेकिन जिस तरह की घटना यहां घटी, उसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। उन्होंने सनातनी प्रतीकों के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा।

प्रशासन का प्रस्ताव ठुकराया
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि माघ मेला प्रशासन की ओर से उन्हें पूरे सम्मान के साथ पालकी में संगम ले जाकर स्नान कराने का प्रस्ताव दिया गया था। प्रस्ताव में फूल बरसाने और विशेष व्यवस्था की बात कही गई थी, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा, “जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पाता। असली सम्मान तब होता है, जब गलती मानकर सच्चे मन से माफी मांगी जाए।” उनका आरोप है कि प्रशासन के प्रस्ताव में मौनी अमावस्या की घटना को लेकर कोई माफी नहीं मांगी गई।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला, CBI जांच की मांग
शंकराचार्य से जुड़े इस पूरे मामले ने अब कानूनी रूप भी ले लिया है। वकील गौरव द्विवेदी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लेटर पिटिशन भेजकर घटना की CBI जांच कराने की मांग की है।

18 दिन पहले छोड़ा माघ मेला
माघ मेला 15 फरवरी तक चलेगा और अभी माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) व महाशिवरात्रि (15 फरवरी) के दो प्रमुख स्नान बाकी हैं। शंकराचार्य ने विवाद के चलते मेला 18 दिन पहले ही छोड़ दिया। मौनी अमावस्या के दिन विवाद के बाद उन्होंने स्नान नहीं किया था, फिर बसंत पंचमी पर भी संगम में नहीं उतरे। अब वे शेष दोनों स्नानों में भी शामिल नहीं होंगे।

शंकराचार्य की 4 बड़ी बातें...

1. आत्मा को झकझोर देने वाली घटना
उन्होंने कहा कि इस घटना ने उनकी आत्मा को झकझोर दिया है और न्याय व मानवता पर विश्वास कमजोर हुआ है। इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

2. माफी के बिना सम्मान स्वीकार नहीं
शंकराचार्य ने कहा कि बिना माफी के दिया गया सम्मान केवल दिखावा है, जिसे वे स्वीकार नहीं कर सकते।

3. जीत-हार का फैसला समय करेगा
उन्होंने कहा कि संतों और संन्यासियों के अपमान की भरपाई दिखावटी सम्मान से नहीं हो सकती। फैसला सनातनी समाज करेगा।

4. आंदोलन की चेतावनी
उन्होंने कहा कि अगर सनातनी समाज चाहेगा तो वे शांत नहीं बैठेंगे। युवाओं से अपील की कि सनातनी प्रतीकों का अपमान करने वालों को जवाब दिया जाए।

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