यूपी विधानसभा का 3 दिन का सत्र मात्र 2 घंटे चला, सतीश महाना ने दी कुर्सी छोड़ने की चेतावनी, सपा के रवैये पर भड़के सीएम योगी 

विधानसभा में लगातार तीसरे दिन हंगामा हुआ, लेकिन सबसे बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब अध्यक्ष सतीश महाना ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने अपनी भूमिका पर सवाल उठाते हुए बड़ा संकेत दिया। आखिर सदन में ऐसा क्या हुआ कि पूरा मानसून सत्र तय समय से पहले खत्म करना पड़ा ?

Aug 5, 2026 - 14:38
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यूपी विधानसभा का 3 दिन का सत्र मात्र 2 घंटे चला, सतीश महाना ने दी कुर्सी छोड़ने की चेतावनी, सपा के रवैये पर भड़के सीएम योगी 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र तय समय से एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। लेकिन सत्र की सबसे बड़ी चर्चा सिर्फ हंगामा नहीं, बल्कि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की वह भावुक टिप्पणी रही, जिसमें उन्होंने पहली बार अपने पद पर बने रहने को लेकर गंभीर संकेत दिए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही उन्होंने कहा कि पिछले दिन जो कुछ हुआ, उससे वह आहत हैं और अब उन्हें यह भी सोचना पड़ेगा कि वह इस कुर्सी के योग्य हैं या नहीं। महाना ने कहा कि कल सदन में जो हुआ, उससे उनके मन को गहरी पीड़ा पहुंची है। उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि या तो उनके प्रयासों में कहीं कमी रह गई या फिर डॉ. भीमराव अंबेडकर की वह बात सही साबित होती है कि कमी संविधान में नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले व्यक्तियों में होती है। उन्होंने कहा कि उनकी लंबी राजनीतिक पारी अब अंतिम चरण में है और अब उन्हें गंभीरता से विचार करना होगा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में उन्होंने जो किया, वह सही था या नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि वह इस बात पर भी विचार करेंगे कि इस कुर्सी के योग्य हैं या नहीं और जल्द ही इस संबंध में निर्णय लेंगे।

हंगामे के बीच समय से पहले खत्म हुआ सत्र
बुधवार को समाजवादी पार्टी के लगातार विरोध और हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही तय कार्यक्रम से एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। पहले सत्र गुरुवार तक चलना था, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए इसे बुधवार को ही समाप्त कर दिया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए समाजवादी पार्टी पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में एक बार फिर समाजवादी पार्टी का अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक चेहरा सामने आया है। उनका यह आचरण असंवैधानिक होने के साथ-साथ किसान, युवा, महिला और गरीब विरोधी भी है।

तीन दिन का सत्र, लेकिन कार्यवाही सिर्फ दो घंटे
मानसून सत्र की अवधि तीन दिन रही, लेकिन सदन की वास्तविक कार्यवाही करीब दो घंटे ही चल सकी। पहले दिन शोक प्रस्ताव पढ़ा गया। दूसरे दिन समाजवादी पार्टी के हंगामे के बीच वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने अनुपूरक बजट पेश किया। तीसरे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सदन में अपनी बात रखनी थी, लेकिन लगातार विरोध के कारण चर्चा नहीं हो सकी। हंगामे के बीच 59 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट बिना विस्तृत चर्चा के पारित हो गया। इसके बाद संभल दंगे की रिपोर्ट सदन में रखी गई और कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

सीएम योगी ने वेलफेयर योजनाओं पर चर्चा न होने का ठहराया जिम्मेदार
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नकारात्मक रवैये के कारण किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के लिए प्रस्तावित कल्याणकारी योजनाओं पर सदन में चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किया है और विधानसभा ने समाजवादी पार्टी के दोहरे चरित्र को उजागर किया है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के व्यवहार की निंदा भी की।

सत्र शुरू होने से पहले ही विरोध का प्रदर्शन
बुधवार सुबह विधानसभा परिसर में समाजवादी पार्टी के विधायकों ने 69000 शिक्षक भर्ती और राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। विधायक अतुल प्रधान दानपेटी लेकर पहुंचे, जबकि सदन से निष्कासित विधायक सचिन यादव आधा बोरा आलू लेकर विधानसभा के बाहर धरने पर बैठे रहे। उन्होंने आलू की माला भी पहन रखी थी और उनके पास लगे पोस्टर पर किसान की समस्याओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए गए थे। वहीं, शिवपाल यादव ने आरोप लगाया कि पहले बजट को लूटा गया और अब चंदे की चोरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि छोटे लोगों पर कार्रवाई हो रही है, जबकि बड़े लोगों को छोड़ दिया जा रहा है।

एक दिन पहले की घटना बनी पूरे विवाद की वजह
बुधवार को अध्यक्ष सतीश महाना की नाराजगी की वजह मंगलवार की घटना रही। उस दिन नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे थे। अनुमति नहीं मिलने पर समाजवादी पार्टी के विधायक विरोध करने लगे। इसी दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन के समय समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव ने उनकी फोटो लहराई। यह देखकर अध्यक्ष सतीश महाना अपनी सीट से खड़े हो गए। उन्होंने हेडफोन फेंकते हुए विधायक को ऐसा करने से रोका और कड़ी नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपनी सीट से खड़े हुए और कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन कुछ लोग लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नारेबाजी तेज हो गई। दोनों दलों की महिला विधायक भी आमने-सामने आ गईं। हालात बिगड़ने पर अध्यक्ष ने विधायक सचिन यादव को पूरे सत्र के लिए सदन से निष्कासित कर दिया।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content