धर्मांतरण कानून का गलत इस्तेमाल? झूठी FIR पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, कहा- खतरनाक ट्रेंड

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी में धर्मांतरण कानून के तहत झूठी FIR के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है। कोर्ट ने इसे खतरनाक ट्रेंड बताया और सरकार से जवाब मांगा है। बहराइच केस में पीड़िता के बयान के बाद भी जांच जारी रखने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

Apr 16, 2026 - 10:04
 0
धर्मांतरण कानून का गलत इस्तेमाल? झूठी FIR पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, कहा- खतरनाक ट्रेंड

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम सुनवाई में उत्तर प्रदेश के ‘गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021’ के तहत दर्ज हो रही FIR को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत तेजी से FIR दर्ज कराई जा रही हैं, जो बाद में गलत साबित हो रही हैं। अदालत ने इसे “चिंताजनक ट्रेंड” बताया और कहा कि इस पर सख्त नजर रखने की जरूरत है।

सरकार से मांगा जवाब, हलफनामा दाखिल करने का आदेश
जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई की जा रही है। यह आदेश मोहम्मद फैजान और अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

बहराइच की FIR पर उठे सवाल
यह मामला बहराइच जिले के एक पुलिस थाने में दर्ज FIR से जुड़ा है। इसमें आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ताओं ने शिकायतकर्ता की 18 साल की बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाया और उसका धर्म परिवर्तन कर शादी करने का दबाव बनाया। याचिकाकर्ताओं ने इस FIR को रद्द करने की मांग की थी।

पीड़िता के बयान से सामने आई सच्चाई
सुनवाई के दौरान कोर्ट को पीड़िता का बयान भी बताया गया, जो BNSS की धारा 183 के तहत दर्ज हुआ था। इसमें पीड़िता ने कहा कि वह पिछले तीन साल से याचिकाकर्ता के साथ अपनी मर्जी से रिश्ते में थी। उसने धर्म परिवर्तन, जबरन शादी और किसी भी तरह के आरोपों से साफ इनकार किया। उसने यह भी कहा कि वह याचिकाकर्ता के साथ रहना चाहती है और किसी तरह की परेशानी नहीं चाहती।

जांच जारी रखने पर कोर्ट ने उठाए सवाल
कोर्ट ने पाया कि पीड़िता के बयान के बाद भी जांच अधिकारी ने सिर्फ रेप का आरोप हटाया, जबकि अपहरण, हमले और धर्मांतरण कानून की धाराओं में जांच जारी रखी। अदालत ने इसे “अजीब स्थिति” बताया और कहा कि जब आरोप गलत साबित हो गए, तो आगे जांच का कोई मतलब नहीं है।

19 मई तक जवाब, गिरफ्तारी पर रोक
कोर्ट ने पीड़िता के पिता को अगली सुनवाई में पेश होने का आदेश दिया है और पूछा है कि झूठी FIR दर्ज कराने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न हो। साथ ही अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को 19 मई तक हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है। इस बीच कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार को 3 दिन के भीतर सभी पक्षों को सुरक्षा देने का निर्देश दिया है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी, UP News Network में सब-एडिटर हैं। राजनीति, क्राइम, स्पोर्ट्स, ज्योतिष और धार्मिक विषयों से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से काम करते हैं। मीडिया जगत में 3 वर्ष का अनुभव है। रिपोर्टिंग, स्पेशल स्टोरीज़ और स्पेशल खरी-खोटी जैसे कार्यक्रमों पर काम किया है। कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एंकरिंग का भी अनुभव है। SumanTV, Hyderabad (डिजिटल प्लेटफॉर्म) के साथ कार्य कर चुके हैं और ZEE News व India Watch जैसे प्रतिष्ठित न्यूज़ संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव हासिल किया है। पिछले 1 साल से यूपी न्यूज़ नेटवर्क (डिजिटल) से जुड़ा हुआ हूं और उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। एमजेएमसी की पढ़ाई कर चुके अश्वनी तिवारी की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, ज़मीनी मुद्दों और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने वाली पत्रकारिता से है। मेरी जन्मस्थली वाराणसी है, जबकि कार्य के दौरान मैं कई शहरों में रहकर पत्रकारिता कर चुका हूं।