गर्लफ्रेंड के महंगे शौक पूरे करने के लिए बना किडनैपर, डेढ़ साल के मासूम को बेचने की थी तैयारी
बरेली में डेढ़ साल के बच्चे के अपहरण मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि मेडिकल स्टाफ नर्स जल्दी पैसा कमाने और गर्लफ्रेंड के महंगे शौक पूरे करने के लिए बच्चा चोरी के धंधे में उतर गया था। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
उत्तर प्रदेश के बरेली में डेढ़ साल के मासूम बच्चे के अपहरण का मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच में सामने आया कि मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स की नौकरी करने वाला युवक जल्दी पैसा कमाने के लालच में बच्चा चोरी के धंधे में उतर गया था। आरोपी अपनी गर्लफ्रेंड के महंगे शौक पूरे करना चाहता था। पुलिस को इस गिरोह के तार बरेली मंडल के अलावा लखीमपुर खीरी और दिल्ली तक जुड़े मिले हैं। मुख्य सरगना की तलाश में पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
स्टाफ नर्स की नौकरी करते-करते जुड़ा बच्चे बेचने वाले गिरोह से
गिरफ्तार आरोपी शाहजहांपुर निवासी योगेश कन्नौजिया ने पूछताछ में बताया कि उसने एमएससी नर्सिंग की पढ़ाई की है और पिछले चार साल से मेडिकल कॉलेज व निजी अस्पताल में स्टाफ नर्स के रूप में काम कर रहा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात लखीमपुर खीरी निवासी उत्तम सिंह से हुई। उत्तम ने उसे बताया कि जिन अमीर परिवारों के बच्चे नहीं होते, उन्हें छोटे बच्चों को बेचकर लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं। इस लालच में आकर योगेश ने अपने साथी बदायूं निवासी पवन चंदेल को साथ मिला लिया। दोनों कई दिनों से ऐसे छोटे बच्चे की तलाश कर रहे थे, जिसे आसानी से उठाया जा सके।
टॉफी और 40 रुपये देकर बच्चे को बहलाया
13 मई को दोनों आरोपी पहली बार मनौना धाम स्थित श्याम मंदिर पहुंचे थे। वहां उन्होंने देखा कि मंदिर परिसर के पीछे कर्मचारी परिवार के साथ रहते हैं और बच्चे आसपास खेलते रहते हैं। वहीं सफाईकर्मी रमन का डेढ़ साल का बेटा ऋषभ उन्हें पसंद आ गया। 24 मई की सुबह दोनों फिर मंदिर पहुंचे। उन्होंने बच्चों को टॉफी और 40 रुपये देकर अपने साथ चलने के लिए बहलाया। बड़े बच्चों को खीरा दिलाया गया, जबकि छोटे ऋषभ को गोद में उठाकर बाइक पर बैठा लिया गया और फरार हो गए।
दिल्ली में बेचने की थी तैयारी
पूछताछ में योगेश ने बताया कि बच्चे को दिल्ली में उत्तम सिंह को सौंपना था, जिसके बदले उन्हें करीब 60 हजार रुपये मिलने वाले थे। रास्ते में आरोपियों की बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें बच्चे के सिर में भी चोट आई। उन्होंने इलाज कराकर बच्चे के सिर पर पट्टी बंधवाई ताकि किसी को शक न हो। इसी दौरान पुलिस लगातार लोकेशन ट्रैक कर रही थी। पुलिस टीम ने पीछा किया तो आरोपियों ने भागने और फायरिंग की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उनके पास से तमंचे, कारतूस और बिना नंबर की बाइक बरामद की है।
बेटे के सुरक्षित मिलने पर रो पड़ा परिवार
मासूम ऋषभ के सुरक्षित मिलने के बाद परिवार की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। पिता रमन ने बताया कि बच्चे के गायब होने के बाद पूरे परिवार ने खाना तक नहीं खाया था। परिवार पहले से ही दुख में था, क्योंकि बड़े भाई की बेटी की हाल ही में मौत हुई थी। ऐसे में ऋषभ के अपहरण ने पूरे परिवार को तोड़ दिया था। बच्चे के सुरक्षित लौटने के बाद परिवार ने पुलिस का धन्यवाद किया।
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