पीरियड्स कोई बीमारी नहीं… सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड लीव की मांग पर कही बड़ी बात

पीरियड्स लीव पर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रव्यापी नीति बनाने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं महिलाओं को कमजोर दिखाने वाली सोच को बढ़ावा दे सकती हैं।

Mar 13, 2026 - 14:20
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पीरियड्स कोई बीमारी नहीं… सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड लीव की मांग पर कही बड़ी बात

Supreme Court: देशभर की महिला छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए पीरियड्स लीव की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। अदालत ने इस दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की याचिकाएं डर का माहौल पैदा करती हैं और अनजाने में महिलाओं को कमजोर या हीन दिखाने की कोशिश करती हैं। कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म महिलाओं के जीवन की सामान्य प्रक्रिया है और इसे किसी बुरी घटना की तरह पेश करना सही नहीं है। अदालत ने साफ किया कि इस विषय पर राष्ट्रव्यापी नीति बनाने के लिए सीधे निर्देश देना उचित नहीं होगा।

राष्ट्रव्यापी नीति बनाने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य करने संबंधी राष्ट्रव्यापी नीति बनाने की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना था कि अगर इस तरह का प्रावधान कानून के जरिए अनिवार्य कर दिया गया, तो इसका उल्टा असर भी पड़ सकता है। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में कई नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं, क्योंकि उन्हें अतिरिक्त सवैतनिक अवकाश देना पड़ेगा।

महिलाओं को कमजोर बताने वाली सोच से सावधान रहने की सलाह
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं महिलाओं के बारे में बनी रूढ़ीवादी धारणाओं को अनजाने में और मजबूत कर सकती हैं। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि यह कहना कि मासिक धर्म महिलाओं के साथ होने वाली कोई बुरी घटना है, सही नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि यह जरूर एक सकारात्मक अधिकार की तरह दिखता है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर भी विचार करना जरूरी है।

नियोक्ताओं और करियर पर पड़ सकता है असर
कोर्ट ने कहा कि अगर पीरियड्स लीव को कानून के तहत अनिवार्य बना दिया जाता है, तो इससे महिलाओं के रोजगार के अवसरों पर असर पड़ सकता है। कई नियोक्ता अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं। अदालत ने यह भी चिंता जताई कि इससे महिलाओं के करियर की प्रगति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

संबंधित प्राधिकारियों को विचार करने की सलाह
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित सक्षम प्राधिकारी इस विषय पर दिए गए अभ्यावेदन पर विचार कर सकते हैं। सभी पक्षों से चर्चा करने के बाद मासिक धर्म अवकाश पर नीति बनाने की संभावना की समीक्षा की जा सकती है। कोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि प्राधिकारियों को इस मामले में उचित निर्णय लेना चाहिए। यह जनहित याचिका शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर की गई थी।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी भारतीय पत्रकार, कंटेंट राइटर, एंकर और मीडिया प्रोफेशनल हैं। वे डिजिटल पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और न्यूज़ प्रोडक्शन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने Zee News, Suman TV और UP News Network जैसे मीडिया संस्थानों के साथ कार्य किया है। वे राजनीतिक, सामाजिक और समसामयिक विषयों पर आधारित डिजिटल कंटेंट और ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा अश्वनी तिवारी का जन्म 4 फरवरी 1997 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज, भेलूपुर, वाराणसी से प्राप्त की। हाई स्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षाएं उन्होंने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से स्नातक (B.A.) की डिग्री प्राप्त की तथा आगे चलकर मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पूरी की। अश्वनी तिवारी ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कंटेंट राइटिंग और डिजिटल मीडिया से की। उन्होंने 10 दिसंबर 2023 से 15 मार्च 2024 तक India Watch, लखनऊ में कंटेंट राइटर के रूप में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल मीडिया कंटेंट पर कार्य किया। इसके बाद उन्होंने 7 मई 2024 से 9 जुलाई 2024 तक Zee News, नोएडा में कंटेंट राइटर के रूप में इंटर्नशिप की। इस दौरान वे न्यूज़ स्क्रिप्ट, डिजिटल कंटेंट और मीडिया रिसर्च से जुड़े रहे। अक्टूबर 2024 से अप्रैल 2025 तक उन्होंने Suman TV, हैदराबाद में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। यहां उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित समाचार एवं डिजिटल कंटेंट तैयार किए। वर्तमान में UP News Network से सब एडिटर के रूप में जुड़े, जहां उन्होंने कंटेंट राइटिंग, एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग का कार्य किया। इस दौरान वे ‘खरी खोटी’ नामक विशेष शो का भी हिस्सा रहे। उन्होंने कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग तथा वीडियो प्रस्तुति की। वर्तमान में अश्वनी तिवारी मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। अश्वनी तिवारी डिजिटल पत्रकारिता और न्यूज़ प्रोडक्शन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनकी विशेषज्ञता कंटेंट राइटिंग, एंकरिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया आधारित न्यूज़ प्रस्तुति में मानी जाती है।