'आपके वोट से ही गायों पर चल रही छुरी', सहारनपुर में शंकराचार्य का बड़ा दावा, मांस निर्यात से लेकर कानूनों तक उठाए कई सवाल
सहारनपुर में गविष्ठि यात्रा के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ हत्या, मांस निर्यात, वोट की भूमिका और कानूनों को लेकर कई बड़े दावे किए। जानिए अपने संबोधन में उन्होंने क्या-क्या कहा और दिनभर यात्रा किन-किन विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी।
सहारनपुर में आयोजित गविष्ठि यात्रा के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भारत में गौ हत्या और मांस निर्यात के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भारत आज ब्राज़ील के साथ विश्व का सबसे बड़ा मांस निर्यातक बनने की दौड़ में शामिल है और देश का नेतृत्व इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। शंकराचार्य ने अपने संबोधन में दावा किया कि प्रधानमंत्री की ओमान यात्रा के दौरान वहां भारतीय मांस खरीदने का प्रस्ताव रखा गया था। उन्होंने कहा कि ओमान की ओर से हलाल प्रमाणित मांस की मांग किए जाने पर उसे स्वीकार कर लिया गया, जिसके बाद भारत से हलाल-प्रमाणित बीफ का निर्यात शुरू हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के कुल मांस निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत है।
'आपका वोट वह छुरी है, जिससे काटी जा रही हैं गायें '
जनसभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि गौ हत्या के लिए केवल पशु वध करने वाले ही नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था को समर्थन देने वाले लोग भी नैतिक रूप से जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का वोट ही सबसे बड़ी शक्ति है और उसी के आधार पर सरकारें बनती हैं। उन्होंने कहा कि आपका वोट वह छुरी है, जिससे आज गायें काटी जा रही हैं। उन्होंने एक कथित मामले का उल्लेख करते हुए दावा किया कि 25 हजार गायों का मांस भैंस के मांस के नाम पर भेजा जा रहा था, जबकि जांच में वह गाय का मांस निकला। उन्होंने लोगों से सवाल किया कि क्या उन्होंने इसी उद्देश्य से अपना वोट दिया था।
वाल्मीकि प्रसंग सुनाकर दिया पाप की जिम्मेदारी का संदेश
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने महर्षि वाल्मीकि और नारद मुनि का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों का स्वयं उत्तरदायी होता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वाल्मीकि के परिवार ने उनके पाप में भागीदार बनने से इनकार कर दिया था, उसी प्रकार कोई भी व्यक्ति दूसरे के पाप का भागीदार नहीं बनता। उन्होंने लोगों से गौ हत्या जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए जागरूक होने का आह्वान किया।
शास्त्रों का हवाला देकर गौ हत्या को बताया महापाप
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में संस्कृत श्लोक उद्धृत करते हुए कहा कि शास्त्रों के अनुसार गौ हत्या में केवल हत्या करने वाला ही नहीं, बल्कि अनुमति देने वाला, खरीदने-बेचने वाला, मांस तैयार करने वाला, परोसने वाला और उसका सेवन करने वाला भी दोषी माना गया है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में गौ हत्या के लिए कठोर दंड का उल्लेख है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में वोट देने वाला व्यक्ति भी नैतिक रूप से इस जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।
'वोट के जरिए बनाए गए धर्म विरोधी कानून'
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि जनता के वोट से ऐसी सरकारें बनीं जिन्होंने धर्म के विरुद्ध 37 कानून बनाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि समलैंगिक संबंधों और व्यभिचार से जुड़े कानूनों में बदलाव किए गए, जिन्हें उन्होंने हिंदू शास्त्रों की मान्यताओं के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि इन परिवर्तनों के लिए जनता की लोकतांत्रिक सहमति भी जिम्मेदार है और लोगों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपने वोट के महत्व को समझने की अपील की।
'हिंदू शब्द का संबंध गौ रक्षा से'
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू शब्द की उत्पत्ति सिंधु नदी से नहीं, बल्कि ऋग्वेद के गो सूक्त से जुड़ी है। उन्होंने दावा किया कि हिंदू समाज का मूल स्वरूप गौ रक्षा से जुड़ा हुआ है और भारत की सांस्कृतिक पहचान भी इसी भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि देश के नाम हिंदुस्तान में भी गौ संरक्षण का संदेश निहित है।
'सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर'
उत्तर प्रदेश की गौ संरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए शंकराचार्य ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में गौ सेवा के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर गौशालाओं की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई गौ आश्रय केंद्रों में गायों को पर्याप्त भोजन और पानी तक नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी दावों और वास्तविक स्थिति के बीच का अंतर जनता के सामने है।
छह विधानसभा क्षेत्रों में पहुंची गविष्ठि यात्रा
शनिवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 81 दिवसीय गविष्ठि यात्रा सहारनपुर जिले की छह विधानसभा सीटों से होकर गुजरी। यात्रा की शुरुआत गंगोह विधानसभा के ननौता से हुई। इसके बाद काफिला नकुड़, बेहट, सहारनपुर देहात और सहारनपुर नगर विधानसभा पहुंचा। दिनभर विभिन्न स्थानों पर आयोजित जनसभाओं और संवाद कार्यक्रमों के बाद यात्रा रामपुर मनिहारन विधानसभा पहुंची, जहां शंकराचार्य के रात्रि विश्राम का कार्यक्रम निर्धारित रहा। यात्रा मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। वहीं कल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की ये यात्रा सहारनपुर के देवबंद विधानसभा से होते हुए मुजफ्फरनगर जिले में प्रवेश करेगी।
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