12 करोड़ के टेंडर घोटाले का शाहजहांपुर कनेक्शन, CBI ने OCF अफसर के घर मारा छापा, रिश्वत और फर्जी कंपनियों के खेल की जांच तेज
शाहजहांपुर में CBI की बड़ी कार्रवाई, 12 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले की जांच में OCF अफसर दीपेश गुप्ता और कपिल पांडेय के घर छापेमारी। फर्जी कंपनियों, रिश्वत और डमी टेंडर के आरोपों ने बढ़ाई जांच की रफ्तार।
फर्जी टेंडर, डमी कंपनियां और करोड़ों रुपये की रिश्वत के आरोपों से जुड़े आयुध उपकरण निर्माणी (OEF) फिरोजाबाद घोटाले की जांच अब शाहजहांपुर तक पहुंच गई है। CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा गाजियाबाद की टीम ने बुधवार सुबह शाहजहांपुर में दो ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। CBI की टीम ने आयुध वस्त्र निर्माणी (OCF) शाहजहांपुर में तैनात कनिष्ठ कार्य प्रबंधक दीपेश गुप्ता के सरकारी आवास और सदर बाजार थाना क्षेत्र के चिनौर निवासी कपिल कुमार पांडेय के घर पर दबिश दी। हालांकि, कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपी अपने-अपने ठिकानों पर मौजूद नहीं मिले। काफी देर तक तलाश के बाद भी जब दोनों का कोई सुराग नहीं मिला तो CBI ने दोनों आवासों को सील कर दिया।
2022 से 2025 के बीच हुआ 12 करोड़ का खेल
यह पूरा मामला फिरोजाबाद के हजरतपुर स्थित आयुध उपकरण निर्माणी में वर्ष 2022 से 2025 के बीच हुए करीब 12 करोड़ रुपये के कथित टेंडर घोटाले से जुड़ा है। CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने इस मामले में चार अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। जांच एजेंसी ने तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक (CGM) अमित सिंह, वर्तमान में OCF शाहजहांपुर में तैनात कनिष्ठ कार्य प्रबंधक दीपेश गुप्ता समेत कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर पसंदीदा और डमी कंपनियों को करोड़ों रुपये के ठेके दिलाए गए। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
फर्जी दस्तावेजों से मिली कंपनियों को मंजूरी
CBI की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया के दौरान सरकारी कंप्यूटर और कारखाने के इंटरनेट नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार कर डमी कंपनियों को योग्य दिखाया गया और इसके बाद उन्हें टेंडर आवंटित कर दिए गए। जांच में अधिकारियों को रिश्वत देने के साथ-साथ अन्य लाभ पहुंचाने के आरोप भी सामने आए हैं। CBI के अनुसार, अधिकारियों को लाखों रुपये की रिश्वत देने के अलावा दक्षिण कोरिया के सियोल की हवाई यात्रा के टिकट और परिजनों के खातों में धनराशि ट्रांसफर किए जाने की भी जांच की जा रही है।
दीपेश गुप्ता पर 38.44 लाख रिश्वत लेने का आरोप
CBI के मुताबिक, OCF शाहजहांपुर में तैनात कनिष्ठ कार्य प्रबंधक दीपेश गुप्ता पर टेंडर में हेराफेरी कर 38.44 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। वहीं तत्कालीन JLM मनोज कुमार पर 21.41 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। इसके अलावा तत्कालीन CGM अमित सिंह और उनकी पत्नी नीलम सिंह के लिए दक्षिण कोरिया के सियोल की हवाई यात्रा के टिकट बुक कराने की बात भी जांच में सामने आई है।
डमी कंपनी के जरिए हासिल किए गए करोड़ों के ठेके
जांच एजेंसी के अनुसार, मैसर्स MMSM एंटरप्राइजेज नाम की कंपनी को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। कागजों में संतोष कुमार को कंपनी का प्रोपराइटर दिखाया गया, लेकिन आरोप है कि कंपनी का वास्तविक संचालन कारखाने के अधिकारियों के इशारे पर किया जा रहा था। CBI का कहना है कि जेम (GeM) पोर्टल पर सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर हासिल किए गए।
10 लोगों पर FIR, इंस्पेक्टर सुभेंदु कुमार कर रहे जांच
इस मामले में तत्कालीन CGM अमित सिंह, दीपेश गुप्ता, मनोज कुमार, ठेकेदार संतोष कुमार और कथित मुख्य सूत्रधार कपिल कुमार पांडेय समेत कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पूरे मामले की जांच CBI इंस्पेक्टर सुभेंदु कुमार कर रहे हैं। शाहजहांपुर में हुई यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि जांच एजेंसी अब घोटाले से जुड़े हर व्यक्ति और हर कड़ी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
रिपोर्ट-: कमल सिंह
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