पुरुष या महिला… मानसून में सांप किसे ज्यादा काटते हैं? 7 हजार मामलों की स्टडी ने खोला राज
मानसून में सांप काटने की घटनाएं क्यों बढ़ जाती हैं और आखिर कौन लोग सबसे ज्यादा इसके शिकार होते हैं? ICMR के अध्ययन में सामने आया कि पुरुष, किसान, मजदूर और गरीब परिवार सबसे ज्यादा खतरे में हैं। जानिए सांप के डंक से जुड़ी पूरी कहानी, चौंकाने वाले आंकड़ों और वजहों के साथ।
मानसून की पहली बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं ग्रामीण इलाकों में एक खतरा भी बढ़ा देती है। खेतों, कच्चे घरों और झाड़ियों के आसपास सांपों की आवाजाही बढ़ जाती है। हर साल बारिश के मौसम में सांप काटने की घटनाएं अचानक बढ़ जाती हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर सांप सबसे ज्यादा किसे अपना शिकार बनाते हैं? क्या पुरुष और महिलाएं बराबर खतरे में होते हैं या किसी एक वर्ग पर इसका असर ज्यादा पड़ता है? हालिया आंकड़े बताते हैं कि सांपों के हमलों का खतरा सभी के लिए समान नहीं है। सबसे ज्यादा प्रभावित होने वालों में पुरुष, खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार शामिल हैं।
7 हजार से ज्यादा मामलों का विश्लेषण, सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की मदद से किए गए एक अध्ययन में सांप काटने की घटनाओं का गहराई से विश्लेषण किया गया। अध्ययन के दौरान 25 जिलों में सांप काटने के कुल 7,094 मामले दर्ज किए गए। इन आंकड़ों में यह सामने आया कि सांप काटने के सबसे ज्यादा शिकार कामकाजी उम्र के लोग हुए।
अध्ययन के मुताबिक-
- 64.1% पीड़ित पुरुष थे।
- सबसे ज्यादा मामले 30 से 39 साल की उम्र के लोगों में (20.9%) मिले।
- पेशे के आधार पर मजदूर (25.4%) और कृषि से जुड़े लोग (24.5%) सबसे अधिक प्रभावित रहे।
इन आंकड़ों से साफ है कि जो लोग रोजी-रोटी के लिए खेतों, जंगलों और खुले इलाकों में ज्यादा समय बिताते हैं, उनके लिए सांप का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
आखिर पुरुषों को ही ज्यादा क्यों काटते हैं सांप?
सांप पुरुषों को ज्यादा काटते हैं, इसके पीछे कोई खास जैविक कारण नहीं है, बल्कि उनकी कामकाजी जिंदगी इसकी बड़ी वजह है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती, पशुपालन, मजदूरी और निर्माण जैसे कामों में पुरुषों की भागीदारी अधिक होती है। इन कामों के दौरान उनका सामना अक्सर खेतों, झाड़ियों और जमीन के करीब रहने वाले सांपों से होता है। इसके अलावा कई लोग रात के समय खेतों में पानी लगाने, फसल देखने या अन्य कामों के लिए बाहर जाते हैं। अंधेरे में सांप दिखाई नहीं देते और यही छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
मानसून में ही क्यों निकल आते हैं सांप?
बारिश का मौसम सांपों के लिए भी मुश्किल समय होता है। लगातार बारिश के कारण उनके बिलों में पानी भर जाता है, जिसके बाद वे सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकलने लगते हैं। यही वजह है कि कई बार सांप घरों, खेतों और इंसानी बस्तियों तक पहुंच जाते हैं। दूसरी तरफ, मानसून में खेती का काम भी अपने चरम पर होता है। बुआई और रोपाई के दौरान किसान और मजदूर लंबे समय तक खेतों में रहते हैं, जिससे सांपों से सामना होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। अध्ययन में भी सामने आया कि सांप काटने की 62% घटनाएं मानसून के मौसम में हुईं।
गरीबी भी बढ़ा रही सांप के डंक का खतरा
सांप काटने का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ता है, जो पहले से आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे होते हैं। अध्ययन के अनुसार, करीब 53% पीड़ित गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों से जुड़े थे। गरीब परिवारों में खतरा बढ़ने की कई वजहें हैं। कई लोग कच्चे मकानों में रहते हैं, जहां सांपों के आने की संभावना ज्यादा होती है। कई परिवार जमीन पर सोते हैं और घरों के आसपास साफ-सफाई की कमी भी जोखिम बढ़ाती है। इसके अलावा गांवों में अस्पताल दूर होने और इलाज की जानकारी कम होने के कारण कई लोग पहले झाड़-फूंक या घरेलू उपायों पर निर्भर हो जाते हैं। यही देरी कई बार जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन जाती है।
सांप काटने के बाद रास्ते में चली जाती है जान
सांप के जहर से ज्यादा खतरनाक कई बार इलाज में होने वाली देरी साबित होती है। अध्ययन में सामने आया कि सांप काटने से होने वाली करीब 43% मौतें अस्पताल पहुंचने से पहले या रास्ते में ही हो जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पीड़ित को समय पर अस्पताल पहुंचाकर एंटी-स्नेक वेनम दिया जाए तो ज्यादातर मामलों में जान बचाई जा सकती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पतालों की दूरी, एंबुलेंस की कमी और जागरूकता का अभाव आज भी बड़ी चुनौती है।
UP समेत इन राज्यों में सांप काटने का खतरा ज्यादा
भारत के कई कृषि प्रधान राज्यों में सांप काटने के मामले अधिक सामने आते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, गुजरात और आंध्र प्रदेश-तेलंगाना जैसे राज्यों में इसका खतरा ज्यादा है। इन राज्यों में खेती पर निर्भर बड़ी आबादी, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और इलाज तक पहुंचने में देरी इसकी मुख्य वजह मानी जाती है।
दुनिया में हर साल लाखों लोग सांप के जहर का शिकार
सांप काटना सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक दुनिया में हर साल करीब 54 लाख लोग सांप काटने की घटनाओं का सामना करते हैं। इनमें करीब 18 से 27 लाख मामलों में जहर शरीर में फैल जाता है। इससे हर साल करीब 81 हजार से 1.38 लाख लोगों की मौत होती है, जबकि लगभग 4 लाख लोग स्थायी विकलांगता या गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित होते हैं। भारत में भी हर साल करीब 10 से 15 लाख लोगों को सांप काटने का अनुमान है, जिनमें लगभग 58 हजार लोगों की मौत हो जाती है।
सांप से बचना है तो बारिश में रखें इन बातों का ध्यान
बारिश के मौसम में थोड़ी सी सावधानी सांप के खतरे को काफी कम कर सकती है।
- रात में बाहर निकलते समय टॉर्च जरूर रखें।
- घर के आसपास झाड़ियों और कचरे को साफ रखें।
- जमीन पर सोने से बचें।
- सांप काटने पर झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें।
- तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
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