साइलेंट पैंडेमिक बन रही प्रोग्रेसिव किडनी डिजीज, समय रहते जांच और योग से बचाव संभव
मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापे के कारण गुर्दे की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ रही है। इसके शुरुआती लक्षणों, सरल परीक्षणों और योग से गुर्दे को होने वाले नुकसान को रोकने के तरीकों के बारे में जानें।
दुनिया इस समय कई स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन इसी बीच एक और गंभीर खतरा चुपचाप बढ़ रहा है। यह खतरा है ‘प्रोग्रेसिव किडनी डिजीज’, जिसे अब ‘साइलेंट पैंडेमिक’ कहा जा रहा है। इस बीमारी की खास बात यह है कि इसकी शुरुआत में कोई दर्द या साफ संकेत नहीं मिलते। अधिकतर लोगों को इसका पता तब चलता है जब स्थिति गंभीर हो जाती है और डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर जांच से इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।
शुरुआत में नहीं मिलते साफ संकेत
प्रोग्रेसिव किडनी डिजीज की सबसे बड़ी समस्या यही है कि यह चुपचाप शरीर में बढ़ती रहती है। शुरुआत में न तो तेज दर्द होता है और न ही सूजन जैसे साफ लक्षण दिखाई देते हैं। इस बीमारी की मुख्य वजह डायबिटीज, हाई बीपी और मोटापा माने जाते हैं। जिन लोगों को ये समस्याएं हैं, उनमें किडनी रोग का खतरा अधिक होता है। अधिकतर मामलों में बीमारी का पता तब चलता है जब किडनी को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है।
दो आसान टेस्ट से हो सकता है समय पर पता
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, दो साधारण जांच – सीरम क्रिएटिनिन और यूरिन एल्ब्यूमिन टेस्ट – के जरिए किडनी की स्थिति का समय रहते पता लगाया जा सकता है। ये टेस्ट शरीर में किडनी के कामकाज की सही जानकारी देते हैं। यदि समय पर जांच कर ली जाए, तो बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है और डायलिसिस जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
जागरूकता और योग से बचाव संभव
विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी की बीमारी के प्रति जागरूक रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह तब तक संकेत नहीं देती जब तक नुकसान गहरा न हो जाए। डायबिटीज, हाई बीपी और मोटापे को नियंत्रित रखना किडनी को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है। इसके लिए योग को फायदेमंद माना गया है। नियमित योग अभ्यास से न सिर्फ किडनी बल्कि शरीर के अन्य अंगों पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस साइलेंट पैंडेमिक से बचाव किया जा सकता है।
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