दोना फैक्ट्री या टॉर्चर रूम? बेल्ट, हंटर, गर्म भाले और पिटबुल के डर के साए में जी रहे थे 13 मजदूर, पुलिस ने कराया आजाद
मुजफ्फरनगर की एक दोना-पत्तल फैक्ट्री में नौकरी और अच्छी सैलरी का सपना दिखाकर मजदूरों को फैक्ट्री में कैद कर लिया गया। मजदूरों को दिन-रात काम कराया गया और विरोध करने पर बुरी तरह पीटा गया। विरोध करने पर बेल्ट, डंडों और गर्म भाले से यातनाएं दी गईं, जबकि भागने की कोशिश करने वालों पर पिटबुल डॉग छोड़ दिया जाता था। पुलिस की छापेमारी में 13 मजदूर आजाद हुए। उनकी आपबीती सुनकर पुलिस अधिकारी भी सन्न रह गए।
मुजफ्फरनगर के माड़ी गांव में चल रही एक दोना-पत्तल फैक्ट्री के भीतर जो कुछ हो रहा था, वह किसी अपराध कथा या यातना शिविर की कहानी जैसा लगता है। यहां मजदूरों को नौकरी नहीं, बल्कि कैद की जिंदगी दी गई थी। बाहर की दुनिया से उनका संपर्क खत्म कर दिया गया था। घर जाने की बात करना अपराध था और काम करने से मना करना सजा को न्योता देने जैसा। सोमवार शाम पुलिस ने जब फैक्ट्री पर छापा मारा तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी सन्न रह गए। कई मजदूरों के शरीर पर पुराने और ताजा घावों के निशान थे, जबकि कुछ की आंखों में महीनों की कैद और डर साफ दिखाई दे रहा था।
'घर जाने की बात करता था तो बेल्ट से पीटते थे'
सीतापुर निवासी जगदीश की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे। उन्होंने बताया कि करीब 11 महीने से उन्हें फैक्ट्री में बंधक बनाकर रखा गया था। जब भी वह घर लौटने या काम छोड़ने की बात करते, उन्हें बेल्ट से पीटा जाता था। जगदीश का आरोप है कि लगातार मारपीट के कारण उनका एक कान भी खराब हो गया। उन्होंने बताया कि दिन और रात का कोई फर्क नहीं था। मजदूरों से लगातार काम कराया जाता था और आराम करने तक की इजाजत नहीं मिलती थी। पुलिस द्वारा छुड़ाए जाने के बाद उन्होंने कहा कि उनके लिए पुलिस किसी भगवान से कम नहीं है।
'पिस्तौल दिखाकर कहता था, किसी को बताया तो मारकर फेंक दूंगा'
नैनीताल के रहने वाले रामू की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें बेहतर नौकरी और वेतन का लालच देकर फैक्ट्री तक लाया गया था। लेकिन यहां पहुंचते ही उनकी दुनिया बदल गई। उनका आधार कार्ड जला दिया गया, मोबाइल फोन छीन लिया गया और परिवार से संपर्क पूरी तरह खत्म कर दिया गया। रामू के मुताबिक फैक्ट्री मालिक अक्सर पिस्तौल दिखाकर धमकाता था कि अगर किसी से कुछ कहा या भागने की कोशिश की तो जान से मार देगा। मजदूरों को खाने के नाम पर सिर्फ चोकर की सूखी रोटियां दी जाती थीं। कई लोगों ने महीनों तक सब्जी तक नहीं देखी।
10 हजार की नौकरी का दिया लालच
पुलिस जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान और उसके सहयोगी अलग-अलग राज्यों से गरीब मजदूरों को 10 से 12 हजार रुपए मासिक वेतन का लालच देकर यहां लाते थे। इनमें उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान और नेपाल के लोग शामिल थे। मजदूरों के फैक्ट्री पहुंचते ही उनके दस्तावेज और मोबाइल छीन लिए जाते थे। इसके बाद उन्हें बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जाती थी और न ही तय वेतन दिया जाता था।
भागने की कोशिश पर छोड़ दिया जाता था पिटबुल
मजदूरों के बयान ने पुलिस को भी हैरान कर दिया। उन्होंने बताया कि जो भी फैक्ट्री से भागने की कोशिश करता था, उसके पीछे पिटबुल डॉग छोड़ दिया जाता था। विरोध करने वालों को हंटर, बेल्ट और लोहे की रॉड से पीटा जाता था। कुछ मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें गर्म भाले से दागा तक गया। पुलिस को कई मजदूरों के शरीर पर चोटों और जलने के निशान मिले हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है।
छापेमारी में खुली हैवानियत की परतें
एसएसपी संजय कुमार वर्मा के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने सोमवार शाम करीब छह बजे फैक्ट्री पर छापेमारी की। कार्रवाई में 13 मजदूरों को मुक्त कराया गया। मौके से फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान के पिता प्रदीप बालियान और सुपरवाइजर शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर लिया गया। मुख्य आरोपी अंकित बालियान फिलहाल फरार है और उसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं।
एक मजदूर की मिल चुकी लाश, दो अब भी लापता
मामले की जांच में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। फैक्ट्री से जुड़े तीन मजदूर लंबे समय से गायब बताए गए हैं। इनमें नेपाल के रहने वाले अर्जुन का शव नवंबर 2025 में बोरे में मिला था। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं उसकी मौत का संबंध फैक्ट्री में होने वाली यातनाओं से तो नहीं था। वहीं दो अन्य मजदूरों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। पुलिस का मानना है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
मुक्त मजदूरों को माला पहनाकर किया सम्मानित
मंगलवार को पुलिस लाइन में एक भावुक दृश्य देखने को मिला। जिन मजदूरों ने महीनों तक कैद जैसी जिंदगी झेली थी, उन्हें एसएसपी संजय वर्मा ने माला पहनाकर नए जीवन की शुभकामनाएं दीं। मजदूरों को भोजन और जरूरी सहायता उपलब्ध कराई गई। वहीं सफल कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपए के पुरस्कार की घोषणा भी की गई।
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