अयोध्या को मिली 300 साल पुरानी राम धरोहर, शेषावतार मंदिर के शिखर पर हुआ ध्वजारोहण, रामनगरी में उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम
अयोध्या धाम में शेषावतार मंदिर के शिखर पर श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ध्वजारोहण हुआ। करीब 4 हजार रामभक्त इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। आयोजन के दौरान भगवान श्रीराम से जुड़ी 300 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि भी अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय को सौंपी गई।
अयोध्या धाम मंगलवार को एक बार फिर भक्ति, आस्था और सनातन परंपरा के रंग में रंगा नजर आया। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शेषावतार मंदिर के शिखर पर वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ ध्वजारोहण किया गया। इस ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन के साक्षी बनने के लिए अयोध्या शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से करीब चार हजार रामभक्त मंदिर परिसर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने 'जय श्रीराम' के उद्घोष के बीच इस पल को अपनी आंखों में कैद किया।
11 संतों ने वैदिक विधि से कराया ध्वजारोहण
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में धर्मनगरी के 11 प्रमुख संतों ने शेषावतार मंदिर के शिखर पर ध्वज पूजन कर उसे विधिवत स्थापित कराया। पूज्य महंत शशिकांत दास, ज्ञानी गुरजीत सिंह, महंत रामानंद दास, जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य, दिनेंद्र दास, महंत रामकुमार दास, रामानुज दास, महंत रघुबीर शरण, अधिकारी राजकुमार दास, महंत गिरीश दास और महंत अवधेश दास शास्त्री ने अपने शिष्यों के साथ पूरे अनुष्ठान को संपन्न कराया। पूरे परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज और भक्ति का वातावरण बना रहा।
300 साल पुरानी राम पांडुलिपि बनी आयोजन का सबसे खास आकर्षण
ध्वजारोहण समारोह के दौरान एक ऐसा क्षण भी आया जिसने श्रद्धालुओं और संतों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। अयोध्या के कुमारगंज निवासी जंग बहादुर सिंह ने भगवान श्रीराम से संबंधित लगभग 300 वर्ष पुरानी एक दुर्लभ आध्यात्मिक पांडुलिपि अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के लिए संतों को भेंट की। धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही यह धरोहर अब संग्रहालय में संरक्षित की जाएगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी रामायण परंपरा से जुड़ी इस विरासत को देख और समझ सकें।
लखनऊ अग्निकांड के पीड़ितों के लिए संतों ने की प्रार्थना
आयोजन की शुरुआत लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। संतों और श्रद्धालुओं ने मृतकों की आत्मा की शांति तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए भगवान श्रीराम के चरणों में प्रार्थना की। साथ ही पीड़ित परिवारों को इस दुख की घड़ी में धैर्य और साहस प्रदान करने की भी प्रार्थना की गई।
कार्यक्रम में नहीं पहुंचे डिप्टी सीएम
कार्यक्रम में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के शामिल होने का कार्यक्रम तय था, लेकिन लखनऊ अग्निकांड के बाद दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने राजधानी में रहकर राहत और बचाव कार्यों की निगरानी को प्राथमिकता दी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने उनके इस निर्णय की सराहना की। वहीं संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भी कार्यक्रम स्थगित कर दुर्घटना स्थल का निरीक्षण करने और राहत कार्यों की निगरानी करने के निर्णय को संवेदनशील और जिम्मेदार कदम बताया।
प्रसाद वितरण के साथ संपन्न हुआ आयोजन
ध्वजारोहण कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद और अल्पाहार वितरित किया गया। बड़ी संख्या में पहुंचे रामभक्तों ने श्रीरामलला, श्रीराम परिवार मंदिर, परकोटा सहित अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय, न्यासी अनिल मिश्र सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे और आयोजन की व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।
रिपोर्ट-: अनूप कुमार
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
