'जो अपनी रक्षा नहीं कर सकता, वह आपकी क्या करेगा?' भगवान राम पर स्वामी प्रसाद का विवादित बयान, बोले - बंदर सूर्य को निगल गया, यह कैसे मान लें?
गाजीपुर में पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने राम मंदिर में कथित चोरी का जिक्र करते हुए भगवान राम और हनुमान को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने नई राजनीतिक और धार्मिक बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि अगर भगवान में शक्ति होती तो चोर वहीं भस्म हो जाता। जानिए आखिर उन्होंने क्या-क्या कहा और क्यों बढ़ सकता है विवाद...
उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। गाजीपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने राम मंदिर में कथित चोरी के मामले का जिक्र करते हुए ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक और धार्मिक दोनों हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि यदि भगवान राम में इतनी शक्ति होती कि वे लोगों की रक्षा कर सकें, तो मंदिर में चोरी करने वाला व्यक्ति उसी समय दंडित हो जाता। उनका कहना था कि जब मंदिर में रखे चांदी-सोने और करोड़ों रुपए की रक्षा नहीं हो सकी, तो लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं।
'जो अपने मंदिर की रक्षा नहीं कर सकता, वह आपकी क्या करेगा?'
अपने संबोधन में स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि राम मंदिर में हुई कथित चोरी के बाद यह सवाल खड़ा होता है कि यदि भगवान अपने मंदिर की ही रक्षा नहीं कर सके, तो आम लोगों की रक्षा कैसे करेंगे। उन्होंने कहा कि समाज को किसी भी बात को आंख बंद करके स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे तर्क और विवेक की कसौटी पर परखना चाहिए। उनके इस बयान का वीडियो बुधवार को सामने आया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
हनुमान और सूर्य की कथा पर भी उठाए सवाल
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने भाषण में धार्मिक कथाओं का जिक्र करते हुए हनुमान और सूर्य से जुड़ी मान्यताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोगों को बचपन से कई ऐसी बातें बताई जाती हैं जिन्हें बिना तर्क के स्वीकार कर लिया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पृथ्वी पर जन्मा एक छोटा सा जीव सूर्य जैसे विशाल पिंड को निगल गया, इस बात को लोग बिना सवाल किए मान लेते हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि समाज में वैज्ञानिक सोच और शिक्षा की जरूरत पहले से कहीं अधिक है।
बुद्ध के विचारों का हवाला देकर की तर्क की बात
पूर्व मंत्री ने अपने बयान में भगवान बुद्ध के विचारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बुद्ध ने हमेशा किसी भी विचार को आंख बंद करके स्वीकार करने के बजाय उसे अपने विवेक और बुद्धि की कसौटी पर परखने की सीख दी थी। मौर्य ने कहा कि किसी भी ग्रंथ या परंपरा में लिखी बात को सिर्फ इसलिए स्वीकार नहीं करना चाहिए क्योंकि वह वहां दर्ज है, बल्कि यह देखना चाहिए कि वह व्यवहारिक और तार्किक रूप से कितनी सही है।
'स्कूल में है टीचरों की कमी'
धार्मिक मुद्दों के साथ-साथ स्वामी प्रसाद मौर्य ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में हजारों स्कूल बंद करने की तैयारी थी, लेकिन विरोध के बाद सरकार को पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा कि आज भी सरकारी स्कूल शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। शिक्षकों से पढ़ाने के बजाय जनगणना, चुनाव और अन्य प्रशासनिक कार्य कराए जाते हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। स्वामी प्रसाद ने कहा कि उच्च शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है और इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। उनका कहना था कि आज बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनके लिए अपने बच्चों को विश्वविद्यालय तक पढ़ाना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के बजाय ऐसी परिस्थितियां बनाई जा रही हैं, जिनसे गरीब वर्ग और पीछे छूटता जा रहा है।
'सरकारी राशन के भरोसे 80 करोड़ परिवार'
अपने भाषण के अंतिम हिस्से में स्वामी प्रसाद मौर्य ने देश की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि बड़ी आबादी आज भी सरकारी राशन पर निर्भर है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब करोड़ों परिवार अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हों, तब उनके बच्चों के लिए उच्च शिक्षा का सपना कितना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार को धार्मिक और राजनीतिक बहसों से आगे बढ़कर शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
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