टेरर फंडिंग का डर दिखाकर रिटायर इंस्पेक्टर को डिजिटल अरेस्ट, बैंक की सतर्कता से बची 80 लाख की ठगी
साइबर जालसाजों ने लखनऊ में एक सेवानिवृत्त निरीक्षक को आतंकी वित्तपोषण के आरोपों की धमकी देकर फंसाने की कोशिश की। बैंक कर्मचारियों की सतर्कता ने 80 लाख रुपये बचा लिए।
लखनऊ में साइबर ठगों ने एक रिटायर नगर निगम इंस्पेक्टर को टेरर फंडिंग के झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की। जालसाजों ने खुद को एटीएस और डीआईजी बताकर करीब ढाई घंटे तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा। जेल भेजने की धमकी देकर उनसे 80 लाख रुपये ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया गया। डर के कारण रिटायर इंस्पेक्टर बैंक तक पहुंच गए, लेकिन बैंक कर्मचारियों की समझदारी से बड़ी ठगी टल गई। पूरे मामले में साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई है।
एटीएस इंस्पेक्टर बनकर आया पहला कॉल
बैंक ऑफ महाराष्ट्र, गोमतीनगर शाखा के विधि अधिकारी मनीष सिंह के अनुसार, आशियाना निवासी रिटायर इंस्पेक्टर छेदीलाल मूल रूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं और बैंक के पुराने ग्राहक हैं। 6 फरवरी की सुबह उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस), पुणे का इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया। उसने कहा कि छेदीलाल के आधार कार्ड से खुले कुछ खातों से पहलगाम आतंकी हमले में 40 लाख रुपये की फंडिंग हुई है और जांच चल रही है।
डिजिटल अरेस्ट और वीडियो कॉल से दबाव
जालसाज ने छेदीलाल को बताया कि उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है और किसी को भी इसकी जानकारी नहीं देनी है। कुछ देर बाद वीडियो कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखा और खुद को डीआईजी एटीएस बताया। उसने छेदीलाल से उनके सभी बैंक खातों, एफडी और जमा रकम की जानकारी ले ली। फिर कहा गया कि जांच के लिए सारी रकम बताए गए खातों में तुरंत ट्रांसफर करनी होगी। इसके बाद कॉल एक और वर्दीधारी व्यक्ति को दे दी गई, जो लगातार पैसे भेजने का दबाव बना रहा था।
बैंक में कर्मचारियों को हुआ शक
जेल जाने के डर से घबराए छेदीलाल सुबह करीब 11 बजे बैंक पहुंचे और एक कोने में बैठ गए। वह खातों और एफडी से करीब 80 लाख रुपये निकालने की योजना बना रहे थे। सर्दी के मौसम में भी उनके माथे पर पसीना देखकर बैंक कर्मचारी राजकुमार को शक हुआ। पूछने पर छेदीलाल कुछ नहीं बोले। इसके बाद राजकुमार ने विधि अधिकारी मनीष सिंह को सूचना दी।
समय रहते टली ठगी
मनीष सिंह ने छेदीलाल को समझाया, तब उन्होंने पूरी बात बताई। इसी दौरान जालसाजों की फिर वीडियो कॉल आई। मनीष सिंह ने फोन उठाकर खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले ठगों को फटकार लगाई। यह सुनते ही जालसाजों ने फोन काट दिया और दोबारा संपर्क नहीं किया। इसके बाद बैंक की ओर से ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई।
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