बर्बाद हुआ ईरान फिर भी नहीं मानी हार, सुपरपावर अमेरिका का हाल कर दिया बेहाल.. देखिए रिपोर्ट
IranIsraelWar: 60 दिन के युद्ध में ईरान को भारी नुकसान हुआ, लेकिन वह वैश्विक स्तर पर मजबूत छवि बनाकर उभरा। अमेरिका ने सैन्य जीत हासिल की, लेकिन उसकी साख को झटका लगा। इस युद्ध ने दिखाया कि अब दुनिया में शक्ति संतुलन बदल रहा है और महाशक्तियां भी सीमित हो गई हैं।
28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ अमेरिका-ईरान-इजराइल युद्ध अब 60 दिन पूरे कर चुका है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम से शुरू हुए इस संघर्ष ने मध्य पूर्व की तस्वीर बदल दी है। दो महीनों में हालात तेजी से बदले, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान ईरान को झेलना पड़ा। वहीं, अमेरिका की वैश्विक साख को भी बड़ा झटका लगा है। हैरानी की बात यह है कि भारी तबाही के बावजूद ईरान की छवि मजबूत होकर उभरी है। इस युद्ध ने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अब महाशक्तियों का प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा।
ईरान को हुआ भारी नुकसान
युद्ध की शुरुआत में ही ईरान को बड़ा झटका लगा। पहले हमले में उसके सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे गए। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में ईरान के परमाणु केंद्र, मिसाइल फैक्ट्रियां, एयर डिफेंस सिस्टम और नौसेना को भारी नुकसान हुआ। हजारों सैनिक और आम नागरिक मारे गए। तेल निर्यात लगभग रुक गया और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश में ईरान खुद आर्थिक संकट में फंस गया। अनुमान है कि दो महीनों में उसकी अर्थव्यवस्था को 25-30% तक नुकसान हुआ।
फिर भी हीरो कैसे बना ईरान?
इतनी तबाही के बावजूद ईरान ने हार नहीं मानी। उसने सस्ते ड्रोन और मिसाइलों से इजराइल, अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों के तेल ठिकानों पर हमले किए। होर्मुज में संकट पैदा होने से तेल की कीमत 100-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जिससे पूरी दुनिया प्रभावित हुई। रूस और चीन के समर्थन और S-400 जैसी तकनीक ने ईरान को पूरी तरह टूटने से बचा लिया। कई मुस्लिम देशों, ग्लोबल साउथ और विकासशील देशों में ईरान को अब एक मजबूत प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिका-इजराइल की जीत या भारी कीमत?
अमेरिका और इजराइल ने अपने कई सैन्य लक्ष्य हासिल किए, जैसे ईरान का परमाणु कार्यक्रम कमजोर करना और उसकी मिसाइल क्षमता घटाना। लेकिन इसकी कीमत बहुत ज्यादा रही। अमेरिका ने अकेले 70 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर दिए। हजारों मिसाइलें दागी गईं, जिससे उसकी अपनी सैन्य ताकत पर भी असर पड़ा। अब इन संसाधनों को फिर से तैयार करने में सालों लग सकते हैं।
दुनिया की राजनीति में बड़ा बदलाव
इस युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ा। तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ी और एशिया-यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुईं। सबसे बड़ा झटका अमेरिका की छवि को लगा। उसके सहयोगी देश जैसे NATO और QUAD भी पूरी तरह साथ नहीं दिखे। यूरोप ने दूरी बना ली, जबकि BRICS और बहुध्रुवीय दुनिया की ताकत बढ़ती नजर आई।
क्या है 60 दिन बाद का असर
अब युद्ध रुकने की दिशा में बढ़ रहा है, लेकिन इसके नतीजे साफ हैं। ईरान सैन्य और आर्थिक रूप से कमजोर हुआ, फिर भी उसकी छवि मजबूत बनी। वहीं अमेरिका ने सैन्य जीत हासिल की, लेकिन रणनीतिक और नैतिक रूप से नुकसान उठाया। यह युद्ध दिखाता है कि आज की दुनिया में ताकत का संतुलन बदल रहा है और छोटे देश भी बड़ी ताकतों को चुनौती दे सकते हैं।
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