निलंबित आईएएस अभिषेक प्रकाश को बड़ी राहत, राज्यपाल ने बहाली का आदेश दिया
निलंबित आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को राहत मिली है क्योंकि राज्यपाल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच द्वारा आरोपपत्र को रद्द करने के बाद उनकी बहाली का आदेश दिया है।
निलंबित चल रहे आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बड़ी राहत मिली है। राज्यपाल ने उनकी सेवा में बहाली का आदेश जारी कर दिया है। आदेश के अनुसार 15 मार्च से अभिषेक प्रकाश दोबारा अपनी सेवा में बहाल हो जाएंगे। हालांकि उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच अभी जारी रहेगी। जांच प्रक्रिया के दौरान साक्ष्य जुटाने का काम चलता रहेगा। इस फैसले के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस मामले की काफी चर्चा हो रही है।
सोलर कंपनी से घूस मांगने का लगा था आरोप
अभिषेक प्रकाश पर एक सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट की मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। शिकायत मिलने के बाद उन्हें 20 मार्च 2025 को निलंबित कर दिया गया था। यह शिकायत एसएईएल सोलर पी6 प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी की ओर से की गई थी। कंपनी ने इस मामले की शिकायत सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्काल प्रभाव से अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी गई।
हाई कोर्ट से मिली राहत
हाल ही मेंइलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में अभिषेक प्रकाश के खिलाफ दाखिल की गई चार्जशीट को रद्द कर दिया। कोर्ट के फैसले के बाद विभागीय स्तर पर उनकी बहाली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई और अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद उन्हें दोबारा सेवा में बहाल कर दिया गया है।
बिचौलिए के जरिए कमीशन मांगने का आरोप
जांच के दौरान आरोप लगाया गया था कि अभिषेक प्रकाश ने एक बिचौलिए के माध्यम से कंपनी से 5 प्रतिशत कमीशन मांगा था। इसी आरोप के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी। अभिषेक प्रकाश का जन्म 1982 में हुआ था और वे मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। उन्होंने आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। प्रशासनिक सेवा में रहते हुए वे कई जिलों में जिलाधिकारी के रूप में भी काम कर चुके हैं।
कई जिलों में जिलाधिकारी रह चुके हैं
आईएएस अभिषेक प्रकाश लखनऊ,लखीमपुर खीरी,अलीगढ़ और हमीरपुर जैसे जिलों में जिलाधिकारी रह चुके हैं। लखनऊ में जिलाधिकारी रहते समय सरोजनीनगर में डिफेंस कॉरिडोर परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण भी उनके कार्यकाल में किया गया था।
कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामले में किसी भी प्रकार के धन के लेन-देन का प्रमाण सामने नहीं आया है। न तो किसी प्रकार की संपत्ति या मूल्यवान वस्तु दिए जाने का सबूत मिला और न ही किसी को धमकी देने का प्रमाण मिला है। इसके अलावा जांच के दौरान कथित एक करोड़ रुपये नकद की भी कोई बरामदगी नहीं हुई। अदालत ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि किसी लोक सेवक को अनुचित लाभ देने की पेशकश की गई थी इन्हीं कारणों के आधार पर अदालत ने चार्जशीट को रद्द करते हुए अभिषेक प्रकाश को राहत दी। हालांकि उनके खिलाफ विभागीय जांच अभी भी जारी रहेगी।
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