अयोध्या में करोड़ों की सरकारी जमीन पर चला प्रशासन का बुलडोजर, पट्टा खत्म होने के बाद भी चल रहा था कारोबार, एक दर्जन से ज्यादा अवैध कब्जे हटाकर प्रशासन ने वापस ली नजूल भूमि

अयोध्या में करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन पर वर्षों से चल रहे अवैध कारोबार पर आखिरकार प्रशासन का शिकंजा कस गया। जांच में सामने आया कि जिस जमीन का पट्टा काफी पहले समाप्त हो चुका था, वहां दुकानें, रेस्टोरेंट, मोटर धुलाई केंद्र और बस बुकिंग सेंटर संचालित किए जा रहे थे। नोटिस के बावजूद जब वैध दस्तावेज नहीं दिखाए गए, तो प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरा परिसर खाली करा दिया। आखिर कितनी बड़ी है यह जमीन और क्या-क्या मिला जांच में?

Jun 6, 2026 - 19:02
Jun 6, 2026 - 19:02
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अयोध्या में करोड़ों की सरकारी जमीन पर चला प्रशासन का बुलडोजर, पट्टा खत्म होने के बाद भी चल रहा था कारोबार, एक दर्जन से ज्यादा अवैध कब्जे हटाकर प्रशासन ने वापस ली नजूल भूमि

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये मूल्य की नजूल भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा लिया। संयुक्त अभियान के दौरान अवैध रूप से संचालित दुकानों, गुमटियों, रेस्टोरेंट, मोटर धुलाई केंद्रों और बस बुकिंग सेंटरों को हटाया गया। साथ ही विवादित परिसर में बने भवन को भी सील कर दिया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी मुहिम के रूप में देखा जा रहा है।

पट्टा खत्म, लेकिन जारी रहा कारोबार
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अमित कुमार भट्ट के अनुसार, नजूल भूमि गाटा संख्या-4108 मि०, क्षेत्रफल 0.7380 हेक्टेयर (करीब 79,180 वर्गफुट) पहले पट्टे पर आवंटित की गई थी। हालांकि, पट्टे की अवधि कई वर्ष पहले समाप्त हो चुकी थी और वर्तमान में यह पूरी भूमि राज्य सरकार के स्वामित्व वाली नजूल संपत्ति है। जांच के दौरान पाया गया कि पट्टा समाप्त होने के बावजूद भूमि के एक हिस्से का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

सरकारी जमीन पर चल रहे थे कारोबार
प्रशासनिक जांच में खुलासा हुआ कि करीब एक दर्जन लोगों ने सरकारी भूमि पर लकड़ी और लोहे की गुमटियां स्थापित कर रखी थीं। यहां दुकानें, छोटे कारखाने, रेस्टोरेंट, मोटर वॉशिंग सेंटर और निजी बसों के बुकिंग कार्यालय संचालित किए जा रहे थे। सबसे अहम बात यह रही कि इन प्रतिष्ठानों से किराया भी वसूला जा रहा था, जबकि संबंधित भूमि पर किसी प्रकार का वैध स्वामित्व या पट्टा प्रभावी नहीं था।

नोटिस के बाद भी नहीं दिखाए दस्तावेज
अपर जिलाधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने पिछले महीने संबंधित वारिसानों को नोटिस जारी कर वैध अभिलेख और स्वामित्व संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया था। लेकिन निर्धारित समयावधि में कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद राजस्व विभाग और नगर निगम के प्रवर्तन दल ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

संयुक्त अभियान में हटे सभी अवैध कब्जे
राजस्व विभाग, नगर निगम और प्रवर्तन टीम की मौजूदगी में पूरे परिसर को खाली कराया गया। अभियान के दौरान अवैध दुकानें, गुमटियां, रेस्टोरेंट, मोटर धुलाई केंद्र, कारखाने और बस बुकिंग सेंटर हटाए गए। कार्रवाई के बाद परिसर में बने भवन को भी सील कर दिया गया, ताकि दोबारा किसी प्रकार का अवैध उपयोग न हो सके।

प्रशासन का साफ संदेश
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित भूमि पूरी तरह राज्य सरकार की संपत्ति है और उस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि सरकारी भूमि की सुरक्षा और संरक्षण के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा। जहां भी अवैध कब्जे या अतिक्रमण की शिकायत मिलेगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी जमीनों पर बढ़ी निगरानी
अयोध्या में तेजी से हो रहे विकास कार्यों और बढ़ती जमीन की कीमतों के बीच प्रशासन सरकारी संपत्तियों की निगरानी को लेकर भी सतर्क नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में नजूल भूमि और अन्य सरकारी संपत्तियों पर कब्जों के खिलाफ ऐसे अभियान और तेज किए जा सकते हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद शहर में अवैध कब्जाधारकों के बीच हलचल बढ़ गई है, जबकि आम लोगों में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 

रिपोर्ट -: अनूप कुमार 

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