अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप लगाने वाले आशुतोष पांडे के आपराधिक रिकॉर्ड पर उठा विवाद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ POCSO का मामला दर्ज कराने वाले आशुतोष पांडे के आपराधिक पृष्ठभूमि को लेकर नए दावे सामने आए हैं। जांच की मांग उठाई गई है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने वाले आशुतोष पांडे उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। कानपुर निवासी और राष्ट्रीय ब्राह्मण युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता पंकज दीक्षित ने आशुतोष पांडे के आपराधिक इतिहास को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता का पुराना रिकॉर्ड कई सवाल खड़े करता है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। यह विवाद अब कानपुर सहित उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
‘सुनियोजित साजिश’ का आरोप
पंकज दीक्षित ने दावा किया कि आशुतोष पांडे का लंबा और गंभीर आपराधिक इतिहास रहा है। उनके अनुसार, अवैध वसूली, धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े कई मुकदमे पहले भी दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने गोंडा जिले के एक पुराने मामले का जिक्र किया, जिसमें तत्कालीन एसपी नवनीत राणा के नेतृत्व में हुए एक स्टिंग ऑपरेशन में आशुतोष पांडे को कथित तौर पर घूस लेने या देने की कोशिश में पकड़ा गया था। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। यह मामला गोकशी से जुड़े ट्रकों की दलाली से संबंधित बताया गया।
संगठन से निकाला गया था
पंकज दीक्षित के अनुसार, वर्ष 2018 में कानपुर के स्वरूप नगर थाने में भी आशुतोष पांडे के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। उस समय दोनों राष्ट्रीय ब्राह्मण युवजन सभा से जुड़े थे। पंकज दीक्षित प्रदेश अध्यक्ष थे, जबकि आशुतोष पांडे राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। पंकज का कहना है कि संगठन की छवि खराब होने के कारण आशुतोष को बाहर का रास्ता दिखाया गया। बाद में पंकज दीक्षित को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लोगों से अपील की थी कि वे आशुतोष के झांसे में न आएं।
अन्य जिलों में भी मुकदमे दर्ज होने का दावा
पंकज दीक्षित ने यह भी कहा कि आशुतोष पांडे पर गोहत्या, धमकी, धोखाधड़ी और संगठित अपराध से जुड़े मामले अन्य जिलों में भी दर्ज हैं। उनका आरोप है कि वह मीडिया में चर्चा और फर्जी सुरक्षा मांगने के लिए ऐसे कदम उठाते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की है। फिलहाल आरोप-प्रत्यारोप के बीच सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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