12 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की मंजूरी, पिता की गुहार पर आया बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 12 साल से कोमा में पड़े गाजियाबाद के हरीश राणा के लिए पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी। कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर लाइफ सपोर्ट हटाने का फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसले में 12 साल से कोमा में पड़े एक युवक को पैसिव यूथेनेशिया यानी निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी। अदालत ने युवक का आर्टिफिशियल लाइफ सपोर्ट हटाने की मंजूरी दे दी है। यह मामला गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा से जुड़ा है, जो लंबे समय से कोमा की स्थिति में थे। उनके पिता ने बेटे की स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी और गरिमापूर्ण मृत्यु की अनुमति मांगी थी। अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया।
कोर्ट की बेंच ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला
यह फैसला जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में जीवन और मृत्यु से जुड़े दार्शनिक विचारों का भी उल्लेख किया। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि दार्शनिक हेनरी डेविड थोरो के शब्दों में ईश्वर मनुष्य से यह नहीं पूछता कि वह जीवन को स्वीकार करता है या नहीं, बल्कि उसे जीवन लेना ही पड़ता है। अदालत ने यह भी कहा कि विलियम शेक्सपीयर का प्रसिद्ध कथन “To be, or not to be” यानी जीना या न जीना भी इस विषय पर गहरी सोच को दर्शाता है।
12 साल से बिस्तर पर थे हरीश राणा
याचिका के अनुसार गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले हरीश राणा पिछले 12 साल से अधिक समय से कोमा की स्थिति में थे और बिस्तर पर ही जीवन गुजार रहे थे। इस दौरान उन्हें केवल तरल भोजन दिया जाता था और वे पूरी तरह से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर थे। परिवार ने अदालत को बताया कि इतने लंबे समय से उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है।
मेडिकल बोर्ड ने भी दी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले अदालत की ओर से दो अलग-अलग मेडिकल बोर्ड बनाए गए थे। इन बोर्डों ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया कि हरीश राणा के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है। मेडिकल विशेषज्ञों की इस राय के आधार पर अदालत ने पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी। यह फैसला 2018 में आए कॉमन कॉज मामले के फैसले के तहत गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार को मान्यता देने का पहला न्यायिक क्रियान्वयन माना जा रहा है। इस फैसले के बाद हरीश राणा का लाइफ सपोर्ट हटाया जाएगा और उन्हें इच्छामृत्यु के तहत शांतिपूर्ण मृत्यु दी जाएगी।
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