85 विधायक, 16 सांसद… फिर भी नीतीश को बिहार से बाहर भेजने की बात क्यों? जानें क्या है पूरा मामला

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सबसे लंबे समय तक सीएम रहने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अब उनके राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर राजनीति तेज हो गई है, लेकिन उन्होंने साफ किया है कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला है।

Mar 7, 2026 - 09:59
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85 विधायक, 16 सांसद… फिर भी नीतीश को बिहार से बाहर भेजने की बात क्यों? जानें क्या है पूरा मामला

बिहार की राजनीति में एक बड़ा रिकॉर्ड मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम दर्ज हो गया है। उन्होंने राज्य में सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने का पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसके साथ ही 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी उनके ही नाम है। हालांकि उनकी पार्टी समता पार्टी हो या बाद में बना जेडीयू, अपने दम पर कभी पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी। इसके बावजूद भाजपा के सहयोग से वह 2005 से लगातार बिहार की सत्ता में बने रहे। 2014 के कुछ महीनों को छोड़ दें तो लगभग 20 साल तक वे लगातार मुख्यमंत्री रहे। अब उनके राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

भाजपा के सहयोग से बने मुख्यमंत्री
नीतीश कुमार को पहली बार 2005 में मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया था। इस बात को नीतीश कुमार खुद भी स्वीकार कर चुके हैं। इससे पहले वे वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री रह चुके थे। हालांकि दो मौकों पर उन्होंने भाजपा से अलग होने का फैसला लिया, लेकिन जब भी वे वापस लौटे भाजपा ने उन्हें खुले दिल से स्वीकार किया। यहां तक कि 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जेडीयू से ज्यादा सीटें मिली थीं, फिर भी भाजपा ने नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाया।

तेजस्वी यादव के आरोपों पर विवाद
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर विपक्ष के कुछ नेताओं ने इसे भाजपा की साजिश बताया है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे भाजपा का विश्वासघात कहा। हालांकि यह भी सच है कि कुछ महीने पहले तक तेजस्वी और उनकी पार्टी नीतीश कुमार पर लगातार हमला कर रही थी। उन्हें बूढ़ा, बीमार और लाचार तक बताया गया था। हाल तक वे उनके खिलाफ हल्ला बोल अभियान चला रहे थे। ऐसे में अब अचानक भाजपा पर साजिश का आरोप लगाना कई लोगों को विरोधाभासी लग रहा है।

राज्यसभा जाने का फैसला खुद का बताया
नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया है कि राज्यसभा जाने का फैसला उन्होंने किसी दबाव में नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा हमेशा रही है कि वे सभी विधायी सदनों का अनुभव लें। वे पहले ही विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। केवल राज्यसभा ही बाकी थी। इस बार वे अपनी यह इच्छा पूरी करना चाहते हैं। इस बारे में उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान और वीडियो जारी कर स्थिति साफ की।

अब भी मजबूत स्थिति में नीतीश कुमार
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार अब भी बिहार की राजनीति में मजबूत स्थिति में हैं। राज्यसभा जाने के लिए उन्हें किसी दूसरे दल के समर्थन की जरूरत नहीं है, क्योंकि जेडीयू के पास पर्याप्त विधायक हैं और दो सीटें जीतना लगभग तय माना जा रहा है। लोकसभा में भी जेडीयू के 12 सांसद हैं, जो भाजपा के बराबर हैं। राज्यसभा में भी उनके हिस्से की चार सीटें हैं।

बिहार की राजनीति में अब भी प्रभावशाली
बिहार विधानसभा में भाजपा के 89 विधायक हैं जबकि जेडीयू के 85 विधायक हैं। ऐसे में अगर नीतीश कुमार नहीं चाहें तो भाजपा अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सकती। दूसरी ओर वे चाहें तो महागठबंधन के साथ भी सरकार बना सकते हैं, लेकिन वे पहले ही कह चुके हैं कि महागठबंधन के साथ काम करने का अनुभव अच्छा नहीं रहा। उन्होंने कई बार कहा है कि दो बार इधर-उधर जाकर उनसे गलती हुई और अब वे वैसी गलती नहीं दोहराएंगे। इसलिए उनके राज्यसभा जाने के फैसले को राजनीतिक साजिश कहना कई लोगों को सही नहीं लगता।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी, UP News Network में सब-एडिटर हैं। वे राजनीति, क्राइम, स्पोर्ट्स, ज्योतिष और धार्मिक विषयों से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से काम करते हैं। मीडिया जगत में उन्हें 2 वर्ष का अनुभव है। उन्होंने रिपोर्टिंग, स्पेशल स्टोरीज़ और स्पेशल खरी-खोटी जैसे कार्यक्रमों पर काम किया है। कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एंकरिंग का भी अनुभव रखते हैं। SumanTV, Hyderabad (डिजिटल प्लेटफॉर्म) के साथ कार्य कर चुके हैं और ZEE News व India Watch जैसे प्रतिष्ठित न्यूज़ संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव हासिल किया है। पिछले 1 साल से वे यूपी न्यूज़ नेटवर्क (डिजिटल) से जुड़े हैं और उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। एमजेएमसी की पढ़ाई कर चुके अश्वनी तिवारी की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, ज़मीनी मुद्दों और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने वाली पत्रकारिता से है। उनकी जन्मस्थली वाराणसी है, जबकि कार्य के दौरान वे कई शहरों में रहकर पत्रकारिता कर चुके हैं।