यूपी में आज से शुरू होगा आम का महाकुंभ, लखनऊ में एक साथ साथ दिखेंगे 800 से ज्यादा किस्म के आम, मोदी मैंगो और योगीराज की सबसे ज्यादा चर्चा

लखनऊ में शुरू हो रहा तीन दिवसीय आम महोत्सव सिर्फ आमों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की बागवानी, किसानों की कमाई और निर्यात की नई कहानी भी है। मोदी मैंगो, योगीराज, नूरजहां और टॉमी एटकिंस जैसे खास आमों से लेकर किसानों के लिए नई तकनीक और करोड़ों के निर्यात तक... जानिए आखिर इस बार का आम महोत्सव पहले से कितना अलग और खास है।

Jul 3, 2026 - 10:54
Jul 3, 2026 - 11:00
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यूपी में आज से शुरू होगा आम का महाकुंभ, लखनऊ में एक साथ साथ दिखेंगे 800 से ज्यादा किस्म के आम, मोदी मैंगो और योगीराज की सबसे ज्यादा चर्चा

उत्तर प्रदेश की पहचान सिर्फ दशहरी और लंगड़ा तक सीमित नहीं रही। अब प्रदेश के आम दुनिया के बाजार में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। इसी बदलती तस्वीर की झलक आज से राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुरू हो रहे तीन दिवसीय आम महोत्सव में देखने को मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महोत्सव का शुभारंभ करेंगे, जहां एक-दो नहीं बल्कि 800 से अधिक किस्मों के आम प्रदर्शित किए जाएंगे। इस बार प्रदर्शनी का सबसे बड़ा आकर्षण मोदी मैंगो, योगीराज, दुनिया के सबसे बड़े आमों में शामिल नूरजहां, और विदेशी बाजार में लोकप्रिय टॉमी एटकिंस जैसे विशेष आम हैं।

मोदी मैंगो और योगीराज ने बढ़ाई उत्सुकता
हर साल कुछ नई किस्में लोगों को चौंकाती हैं, लेकिन इस बार प्रदर्शनी में मोदी मैंगो और योगीराज नाम वाले आम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। हालांकि आकार और वजन के मामले में सबसे ज्यादा आकर्षण नूरजहां आम बना हुआ है। मध्य प्रदेश के अलीराजपुर क्षेत्र में उगाई जाने वाली यह किस्म दुनिया के सबसे बड़े आमों में गिनी जाती है। सामान्य तौर पर इसका एक फल 2 से 4 किलो तक वजन का हो सकता है, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार कुछ स्थानों पर इसका औसत वजन 1 से डेढ़ किलो भी रहता है। इसके अलावा लालिमा, बनाना, याकूती, अल्फांसो, आम्रपाली, रटौल, लखनऊ सफेदा, चौसा, दशहरी और लंगड़ा जैसी लोकप्रिय किस्में भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

250 रुपये किलो बिक रहा टॉमी एटकिंस की विदेशों में भी जबरदस्त मांग
मलिहाबाद के ग्रीन विशेषज्ञ डॉ. सचिन आर्या के मुताबिक टॉमी एटकिंस आम की बाजार में लगातार मांग बढ़ रही है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका आकर्षक रंग, लंबी शेल्फ लाइफ और निर्यात के लिए उपयुक्त गुणवत्ता है। फिलहाल इसकी कीमत करीब 250 रुपये प्रति किलो है, जो इसे प्रीमियम श्रेणी के आमों में शामिल करती है। उन्होंने बताया कि याकूती आम आकार में बेहद छोटा होता है, लेकिन इसकी मिठास और खुशबू इसे बाकी किस्मों से अलग पहचान दिलाती है। यही वजह है कि छोटे आकार के बावजूद इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

लाल और पीले रंग के विशेष आमों पर भी चल रहा शोध
उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक सुरेश कुमार के अनुसार प्रदेश के उद्यानिक केंद्रों में आम की नई और दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण और विकास पर लगातार काम किया जा रहा है। खास तौर पर लाल और पीले रंग के विशेष आमों पर शोध किया जा रहा है ताकि किसानों को अधिक मूल्य देने वाली नई किस्में उपलब्ध कराई जा सकें।

खेती से लेकर ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट तक मिलेगी पूरी जानकारी
महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण आयोजन 4 जुलाई को होने वाला क्रेता-विक्रेता सम्मेलन माना जा रहा है। उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के अनुसार इस सम्मेलन में देश और विदेश से आने वाले खरीदार सीधे आम उत्पादकों और बागवानों से बातचीत करेंगे। इससे किसानों को नए बाजार मिलने के साथ निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे। महोत्सव में किसानों के लिए विशेष तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। कृषि वैज्ञानिक और उद्यान विभाग के विशेषज्ञ आम की आधुनिक खेती, तुड़ाई के बाद फल की देखभाल, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग और निर्यात की तकनीकों पर विस्तार से जानकारी देंगे। साथ ही आम की विभिन्न श्रेणियों और उससे बने उत्पादों की प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी, जिनमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले बागवानों को सम्मानित किया जाएगा।

रिकॉर्ड निर्यात ने बदल दी यूपी के आम की पहचान
उत्तर प्रदेश पहले से ही देश का सबसे बड़ा आम उत्पादक राज्य है, लेकिन अब उसकी पहचान वैश्विक बाजार में भी मजबूत होती जा रही है। उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में प्रदेश से 3,563 मीट्रिक टन आम का लगभग 12.67 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। सरकार का मानना है कि आम महोत्सव जैसे आयोजन प्रदेश के आम को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

ब्रांड बन रहा है यूपी का आम
एक समय था जब उत्तर प्रदेश का आम सिर्फ स्वाद के लिए जाना जाता था। लेकिन आज वही आम ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग और निर्यात के जरिए वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना रहा है। लखनऊ का यह आम महोत्सव इसी बदलाव की कहानी कहता है, जहां एक तरफ दुर्लभ किस्मों का स्वाद लोगों को आकर्षित करेगा तो दूसरी तरफ किसानों के लिए नए बाजार और नई संभावनाओं के दरवाजे भी खोलेगा।

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