ईरान-इजरायल जंग से बढ़ीं तेल की कीमतें, भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
ईरान-इजराइल युद्ध में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। इस स्थिति का असर भारत की अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल आयात पर पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच चल रहा युद्ध लगातार तेज होता जा रहा है और इसके थमने के संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। इस संघर्ष में संयुक्त राज्य अमेरिका भी इजरायल के साथ खड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि यह युद्ध लंबा चल सकता है। इस स्थिति का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 62 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन अब इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
एक हफ्ते में 90 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
ईरान-इजरायल संघर्ष का नौवां दिन चल रहा है और इस दौरान तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। अमेरिकी कच्चे तेल (डब्ल्यूटीआई) का भाव 90.90 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर हुआ, जो एक सप्ताह पहले की तुलना में करीब 36 प्रतिशत अधिक है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मानक Brent Crude की कीमत भी तेजी से बढ़ी है और यह लगभग 27 प्रतिशत बढ़कर 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव
खाड़ी देशों से दुनिया भर में जाने वाला ज्यादातर तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से गुजरता है। यह इलाका ईरान के पास स्थित है और यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। मौजूदा युद्ध के कारण ईरान ने इस मार्ग पर कई तरह की बंदिशें लगा दी हैं। इससे न केवल तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है, बल्कि शिपिंग और बीमा खर्च भी बढ़ गए हैं। इस अतिरिक्त लागत को ‘वॉर प्रीमियम’ कहा जाता है। मरीन इंश्योरेंस विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध जोखिम बढ़ने के कारण जहाजों के बीमा प्रीमियम में भी तेजी से वृद्धि हो रही है।
भारत की तेल आपूर्ति पर असर की आशंका
भारत अपनी जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल मध्य पूर्व के देशों से आयात करता है। भारतीय रिफाइनरियां भी मुख्य रूप से इसी क्षेत्र के कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए डिजाइन की गई हैं। भारत के पास करीब 25 से 30 दिनों का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है, लेकिन यह केवल आपात स्थिति में इस्तेमाल के लिए रखा गया है। ऐसे में यदि सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित होती है तो भारत को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
महंगाई और जीडीपी पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार तेल की कीमतों में हाल ही में प्रति बैरल 10 से 15 डॉलर की वृद्धि देखी गई है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी भारत की जीडीपी ग्रोथ में लगभग 0.5 प्रतिशत तक की कमी ला सकती है। इससे देश में महंगाई बढ़ने की भी आशंका है।
150 डॉलर तक पहुंच सकती है कीमत
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञ जॉन किल्डफ का कहना है कि तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं कतर के ऊर्जा मंत्री ने भी चेतावनी दी है कि अगर खाड़ी देशों से तेल निर्यात कुछ हफ्तों के लिए रुक गया तो कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। अगर ऐसा होता है तो भारत में महंगाई तेजी से बढ़ सकती है और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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