Petrol-Diesel का खेल खत्म? गन्ने के रस से दौड़ेंगी गाड़ियां, लेकिन कंपनियों ने रख दी बड़ी शर्त

भारत में जल्द फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का दौर शुरू हो सकता है, लेकिन ऑटो कंपनियों ने सरकार के सामने बड़ी शर्त रख दी है। कंपनियों का कहना है कि जब तक एथेनॉल आधारित ईंधन पेट्रोल से सस्ता नहीं होगा, तब तक लोग इन गाड़ियों को अपनाने में रुचि नहीं दिखाएंगे।

May 21, 2026 - 09:22
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Petrol-Diesel का खेल खत्म? गन्ने के रस से दौड़ेंगी गाड़ियां, लेकिन कंपनियों ने रख दी बड़ी शर्त

देश में बहुत जल्द ऐसी गाड़ियां सड़कों पर दौड़ती नजर आ सकती हैं, जो पेट्रोल या डीजल नहीं बल्कि गन्ने के रस और मक्के से बने एथेनॉल ईंधन से चलेंगी। केंद्र सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को तेजी से बढ़ावा देने की तैयारी में जुटी है, ताकि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी पर देश की निर्भरता कम की जा सके। लेकिन इस बड़े बदलाव से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों ने सरकार के सामने एक अहम चिंता रख दी है। कंपनियों का साफ कहना है कि अगर हाई-एथेनॉल फ्यूल पेट्रोल के मुकाबले सस्ता नहीं हुआ तो ग्राहक इन नई गाड़ियों को खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाएंगे।

जानें क्या है E85 और E100? 
फ्लेक्स-फ्यूल को लेकर चर्चा के बीच E85 और E100 जैसे शब्द तेजी से सामने आ रहे हैं। E85 का मतलब है ऐसा ईंधन जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल मिला हो। वहीं E100 पूरी तरह शुद्ध एथेनॉल ईंधन है। पेट्रोलियम मंत्रालय, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स यानी SIAM के बीच हाल में हुई चर्चाओं में यह बात निकलकर सामने आई कि केवल नई तकनीक लाने से बाजार में गाड़ियां नहीं बिकेंगी। ग्राहकों को इसका सीधा आर्थिक फायदा भी दिखना जरूरी है।

माइलेज कम होने की वजह से कंपनियों की चिंता बढ़ी
ऑटो कंपनियों का कहना है कि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल के मुकाबले थोड़ी कम होती है। इसका सीधा असर गाड़ी की माइलेज पर पड़ता है। यानी गाड़ी ज्यादा ईंधन खा सकती है। कंपनियों ने इसके लिए ब्राजील का उदाहरण दिया, जहां एथेनॉल पेट्रोल से काफी सस्ता मिलता है। यही वजह है कि वहां फ्लेक्स-फ्यूल वाहन तेजी से लोकप्रिय हुए। भारतीय कंपनियों का मानना है कि अगर ग्राहकों को फ्यूल खर्च में सीधी बचत नहीं दिखी तो लोग E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल वाले मौजूदा ईंधन से ही काम चलाते रहेंगे।

नई तकनीक वाली गाड़ियां होंगी महंगी
हाई-एथेनॉल ईंधन का इस्तेमाल सामान्य इंजनों में नहीं किया जा सकता। इसके लिए इंजन और फ्यूल सिस्टम में बड़े तकनीकी बदलाव करने पड़ेंगे। इससे गाड़ियों की कीमत बढ़ जाएगी। इसी कारण ऑटो कंपनियां सरकार से टैक्स में राहत की मांग कर रही हैं। फिलहाल इन वाहनों पर भी सामान्य पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की तरह 18 से 40 प्रतिशत तक GST लगाया जाता है। Hero MotoCorp जैसी कंपनियों का कहना है कि भारत जैसे कीमत-संवेदनशील बाजार में शुरुआती दौर में टैक्स छूट बेहद जरूरी है। हालांकि सरकार कारों पर टैक्स कम करने को लेकर अभी सावधानी बरत रही है। इसकी बड़ी वजह इलेक्ट्रिक वाहन हैं, जिन पर केवल 5 प्रतिशत GST लगता है। सरकार नहीं चाहती कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहन सीधे इलेक्ट्रिक गाड़ियों को चुनौती देने लगें। माना जा रहा है कि शुरुआत में टू-व्हीलर सेगमेंट को ज्यादा राहत मिल सकती है।

क्यों दे रही है सरकार फ्लेक्स-फ्यूल पर इतना जोर?
सरकार के लिए यह केवल नई तकनीक नहीं बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसके लिए हर साल 120 अरब डॉलर से ज्यादा की विदेशी मुद्रा खर्च होती है। कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है, जहां अक्सर युद्ध और तनाव की स्थिति बनी रहती है। आंकड़ों के अनुसार, देश में पेट्रोल की कुल खपत का लगभग 95 से 98 प्रतिशत हिस्सा और डीजल की 65 से 70 प्रतिशत मांग ट्रांसपोर्ट सेक्टर से आती है। ऐसे में अगर एथेनॉल का इस्तेमाल बड़े स्तर पर शुरू होता है तो भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता काफी कम हो सकती है और देश का अरबों डॉलर बच सकता है।

100 प्रतिशत एथेनॉल की दिशा में तेजी से बढ़ रहा भारत
भारत अब धीरे-धीरे 100 प्रतिशत एथेनॉल आधारित ईंधन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS ने E22 से E30 तक हाई-एथेनॉल पेट्रोल के लिए नए तकनीकी मानक जारी कर दिए हैं। Maruti Suzuki, Toyota, Tata Motors, Bajaj Auto और Honda जैसी कंपनियां अपने फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप भी पेश कर चुकी हैं। मारुति सुजुकी प्रबंधन ने साफ कहा है कि उद्योग नए मानकों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

पानी की चुनौती बनी बड़ी चिंता
देश में एथेनॉल उत्पादन क्षमता भी तेजी से बढ़ रही है। फिलहाल भारत की उत्पादन क्षमता करीब 20 अरब लीटर तक पहुंच चुकी है, जबकि मौजूदा मांग लगभग 11 अरब लीटर के आसपास है। हालांकि इस पूरी योजना के सामने पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गन्ने से एथेनॉल बनाने में बहुत ज्यादा पानी खर्च होता है। ऐसे में नीति आयोग के पूर्व विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि दूसरी पीढ़ी के एथेनॉल यानी कृषि कचरे से बनने वाले एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाया जाना चाहिए। इससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और किसानों को भी अतिरिक्त फायदा मिल सकता है।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी भारतीय पत्रकार, कंटेंट राइटर, एंकर और मीडिया प्रोफेशनल हैं। वे डिजिटल पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और न्यूज़ प्रोडक्शन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने Zee News, Suman TV और UP News Network जैसे मीडिया संस्थानों के साथ कार्य किया है। वे राजनीतिक, सामाजिक और समसामयिक विषयों पर आधारित डिजिटल कंटेंट और ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा अश्वनी तिवारी का जन्म 4 फरवरी 1997 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज, भेलूपुर, वाराणसी से प्राप्त की। हाई स्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षाएं उन्होंने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से स्नातक (B.A.) की डिग्री प्राप्त की तथा आगे चलकर मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पूरी की। अश्वनी तिवारी ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कंटेंट राइटिंग और डिजिटल मीडिया से की। उन्होंने 10 दिसंबर 2023 से 15 मार्च 2024 तक India Watch, लखनऊ में कंटेंट राइटर के रूप में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल मीडिया कंटेंट पर कार्य किया। इसके बाद उन्होंने 7 मई 2024 से 9 जुलाई 2024 तक Zee News, नोएडा में कंटेंट राइटर के रूप में इंटर्नशिप की। इस दौरान वे न्यूज़ स्क्रिप्ट, डिजिटल कंटेंट और मीडिया रिसर्च से जुड़े रहे। अक्टूबर 2024 से अप्रैल 2025 तक उन्होंने Suman TV, हैदराबाद में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। यहां उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित समाचार एवं डिजिटल कंटेंट तैयार किए। वर्तमान में UP News Network से सब एडिटर के रूप में जुड़े, जहां उन्होंने कंटेंट राइटिंग, एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग का कार्य किया। इस दौरान वे ‘खरी खोटी’ नामक विशेष शो का भी हिस्सा रहे। उन्होंने कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग तथा वीडियो प्रस्तुति की। वर्तमान में अश्वनी तिवारी मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। अश्वनी तिवारी डिजिटल पत्रकारिता और न्यूज़ प्रोडक्शन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनकी विशेषज्ञता कंटेंट राइटिंग, एंकरिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया आधारित न्यूज़ प्रस्तुति में मानी जाती है।