डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 96 के पार, महंगे तेल और मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ी टेंशन
Indian Rupee News: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया सोमवार को अपने सबसे निचले स्तर 96.23 पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बाजार में घबराहट बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर महंगाई, पेट्रोल-डीजल और आम आदमी के बजट पर पड़ सकता है।
सोमवार (18 मई) को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। डॉलर की लगातार मजबूती के बीच पहली बार एक डॉलर की कीमत 96.23 रुपये तक पहुंच गई। शुक्रवार को बाजार बंद होने के समय डॉलर के मुकाबले रुपया 95.97 पर था, लेकिन सप्ताहांत के बाद बाजार खुलते ही रुपये में भारी गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर आने वाले दिनों में महंगाई और आम लोगों के मासिक खर्च पर भी देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव
रुपये की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है। यह दुनिया में तेल सप्लाई का एक बड़ा समुद्री रास्ता माना जाता है। अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है तो पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश का आयात बिल भी तेजी से बढ़ता है।
अमेरिकी आर्थिक संकेतों का भी असर
सिर्फ महंगा तेल ही रुपये की गिरावट की वजह नहीं है, बल्कि अमेरिका से आ रहे आर्थिक संकेत भी भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रहे हैं। अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.625 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इसका मतलब है कि निवेशक अमेरिकी बॉन्ड्स में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को डर है कि वैश्विक महंगाई लंबे समय तक बनी रह सकती है। ऐसे में अमेरिकी केंद्रीय बैंक आगे और सख्त आर्थिक नीतियां अपना सकता है। इसी वजह से विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे एशियाई मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है।
RBI की नजर बाजार पर
मुद्रा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का मानना है कि RBI ने शुक्रवार को रुपये को 96 के पार जाने से रोकने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से बाजार में दखल भी दिया था। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि रिजर्व बैंक किसी एक स्तर को बचाने के बजाय केवल ज्यादा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की कोशिश करेगा। ऐसे में फिलहाल रुपये की गिरावट को पूरी तरह रोकना आसान नहीं दिख रहा है।
आम लोगों पर बढ़ सकती है महंगाई
कमजोर रुपया और महंगा कच्चा तेल सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ा सकता है। जब भारत तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी और अन्य उत्पाद विदेशों से खरीदेगा तो पहले के मुकाबले ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो देश का चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और राजकोषीय संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। इसका असर ट्रांसपोर्टेशन लागत पर पड़ेगा, जिससे खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक महंगे हो सकते हैं।
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