कब मनाई जाएगी बगलामुखी जयंती? नोट कर लें डेट, शुभ समय और आसान पूजा विधि

Baglamukhi Jayanti: बगलामुखी जयंती 2026 में 24 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन मां बगलामुखी की विशेष पूजा का महत्व है। मान्यता है कि उनकी उपासना से शत्रुओं पर विजय, रोगों से राहत और कर्ज से मुक्ति मिलती है। यहां जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा करने की आसान विधि, जिससे आपको पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

Apr 11, 2026 - 09:43
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कब मनाई जाएगी बगलामुखी जयंती? नोट कर लें डेट, शुभ समय और आसान पूजा विधि

हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। यह दिन मां बगलामुखी के प्राकट्य का माना जाता है, जो दस महाविद्याओं में आठवीं देवी हैं। इस दिन भक्त विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां बगलामुखी की आराधना करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है, रोग दूर होते हैं और कर्ज से मुक्ति मिलती है। इसी वजह से यह पर्व खास महत्व रखता है और देशभर में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

तंत्र विद्या की देवी हैं मां बगलामुखी
शास्त्रों के अनुसार मां बगलामुखी को तंत्र विद्या की देवी माना गया है। तंत्रशास्त्र में कहा गया है कि उनकी पूजा से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। भक्तों का मानना है कि मां की कृपा से महामारी का डर खत्म होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इसके साथ ही पूजा करने से मन का भय और चिंता भी कम होती है, जिससे व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है।

बगलामुखी जयंती 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
दृक पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल अष्टमी तिथि 23 अप्रैल 2026 को रात 8 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 24 अप्रैल को शाम 7 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इसी दिन मां बगलामुखी की पूजा और व्रत किया जाएगा।

जानिए मां बगलामुखी की पूजा विधि
बगलामुखी जयंती के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके लिए हाथ में पीले चावल, हल्दी और पीले फूल रखें। इसके बाद पीले रंग के वस्त्र पहनें और घर के पूजा स्थान पर पूर्व दिशा में चौकी रखें। चौकी पर मां बगलामुखी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। पूजा में पीले फूल और पीले फल का विशेष महत्व होता है, इसलिए इन्हीं का उपयोग करें। इसके बाद धूप-दीप और अगरबत्ती जलाकर पूजा करें और मां को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।

व्रत नियम और पारण की जानकारी
व्रत के नियम के अनुसार इस दिन भक्तों को निराहार रहना चाहिए। हालांकि रात में फलाहार किया जा सकता है। अगले दिन पूजा करने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। इस प्रकार विधि-विधान से पूजा करने पर मां बगलामुखी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी, UP News Network में सब-एडिटर हैं। राजनीति, क्राइम, स्पोर्ट्स, ज्योतिष और धार्मिक विषयों से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से काम करते हैं। मीडिया जगत में 3 वर्ष का अनुभव है। रिपोर्टिंग, स्पेशल स्टोरीज़ और स्पेशल खरी-खोटी जैसे कार्यक्रमों पर काम किया है। कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एंकरिंग का भी अनुभव है। SumanTV, Hyderabad (डिजिटल प्लेटफॉर्म) के साथ कार्य कर चुके हैं और ZEE News व India Watch जैसे प्रतिष्ठित न्यूज़ संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव हासिल किया है। पिछले 1 साल से यूपी न्यूज़ नेटवर्क (डिजिटल) से जुड़ा हुआ हूं और उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। एमजेएमसी की पढ़ाई कर चुके अश्वनी तिवारी की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, ज़मीनी मुद्दों और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने वाली पत्रकारिता से है। मेरी जन्मस्थली वाराणसी है, जबकि कार्य के दौरान मैं कई शहरों में रहकर पत्रकारिता कर चुका हूं।