क्या अमेरिका गुपचुप बना रहा बायोवेपन? कोविड वैक्सीन डेवलपर वैज्ञानिक ने खोले चौंकाने वाले राज

अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. रॉबर्ट मलोन ने दावा किया है कि CIA गुप्त रूप से जैविक हथियारों पर काम कर रही है। इस दावे के बाद बायोवेपन और उससे जुड़े इतिहास, प्रयोगों और अंतरराष्ट्रीय नियमों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

Mar 9, 2026 - 14:26
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क्या अमेरिका गुपचुप बना रहा बायोवेपन? कोविड वैक्सीन डेवलपर वैज्ञानिक ने खोले चौंकाने वाले राज

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध की खबरों के बीच एक नया विवाद सामने आया है। अमेरिका के ही एक प्रसिद्ध बायोकेमिस्ट और इम्यूनॉलजिस्ट ने दावा किया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA गुप्त रूप से जैविक हथियार यानी बायोवेपन तैयार कर रही है। इस बयान के बाद दुनिया भर में कई सवाल उठने लगे हैं। यह आरोप जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. रॉबर्ट मलोन ने लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने सरकार के कुछ डिक्लासिफाइड दस्तावेज देखे हैं जिनसे इस तरह के कार्यक्रमों की जानकारी मिलती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इससे जैविक हथियारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

बायोलॉजिकल वेपन क्या होता है
बायोलॉजिकल वेपन या जैविक हथियार ऐसे हथियार होते हैं जो किसी जीवित सूक्ष्मजीव से बनाए जाते हैं। जैसे लैब में वायरस, बैक्टीरिया या फंगस तैयार किए जाते हैं। ये माइक्रोब ऐसे केमिकल या टॉक्सिन पैदा कर सकते हैं जो इंसानों के लिए जहर की तरह काम करते हैं। कई मामलों में वैज्ञानिक ऐसे कीड़ों को भी तैयार करते हैं जो बीमारी फैलाने का काम करते हैं। साधारण भाषा में समझें तो बंदूक की जगह कोई जीव और बारूद की जगह जहर का इस्तेमाल किया जाता है। बायोवेपन बनाने में खर्च अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक रह सकता है।

डॉ. मलोन ने क्या आरोप लगाए
डॉ. रॉबर्ट मलोन के अनुसार अमेरिका में पहले भी जैविक हथियारों से जुड़े प्रयोग किए गए हैं। उन्होंने शीत युद्ध के दौर के बायोलॉजिकल वेपन प्रोग्राम का अध्ययन किया है। उनके अनुसार उस समय Project 112 नाम का एक कार्यक्रम चलाया गया था। इस प्रोग्राम के तहत वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं को कीड़ों के जरिए कैसे फैलाया जा सकता है।

टिक (Ticks) और लाइम बीमारी का उदाहरण
डॉ. मलोन ने एक उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि 1960 के दशक में अमेरिका के कनेक्टिकट राज्य में एक फेडरल लैब के पास बड़ी संख्या में टिक नाम के कीड़े छोड़े गए थे। ये वही कीड़े हैं जो अक्सर कुत्तों और मवेशियों में पाए जाते हैं। बाद में इसी इलाके में पहली बार Lyme Disease नाम की बीमारी सामने आई थी। वैज्ञानिकों ने इन कीड़ों के शरीर में रेडियोएक्टिव कार्बन-14 लगाया था ताकि उनके मूवमेंट को ट्रैक किया जा सके।

पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल
डॉ. मलोन से पहले भी इस तरह के आरोप सामने आ चुके हैं। साल 2025 में अमेरिकी कांग्रेस में भी इस विषय पर जांच की मांग उठी थी। उस समय सवाल किया गया था कि क्या सरकारी एजेंसियां बीमारी फैलाने वाले कीड़ों पर युद्ध से जुड़े प्रयोग कर रही हैं। हालांकि उस समय अमेरिकी एजेंसियों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। इसी तरह इतिहास में इजरायल पर भी आरोप लग चुके हैं। बताया जाता है कि 1948 के अरब-इजरायल युद्ध के दौरान एक गुप्त ऑपरेशन चलाया गया था, जिसमें दुश्मन क्षेत्रों के पानी के स्रोतों में टाइफॉइड बैक्टीरिया फैलाने की योजना थी।

जैविक हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध
दुनिया में जैविक हथियारों को रोकने के लिए 1972 में Biological Weapons Convention बनाया गया था। इस समझौते के तहत जैविक या टॉक्सिन हथियारों को बनाना, जमा करना, ट्रांसफर करना या इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है। भारत इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुका है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह पता लगाना आसान नहीं होता कि कौन देश इस समझौते का पालन कर रहा है और कौन नहीं, क्योंकि कई बार वैज्ञानिक रिसर्च को सैन्य उपयोग से अलग करना मुश्किल हो जाता है।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी भारतीय पत्रकार, कंटेंट राइटर, एंकर और मीडिया प्रोफेशनल हैं। वे डिजिटल पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और न्यूज़ प्रोडक्शन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने Zee News, Suman TV और UP News Network जैसे मीडिया संस्थानों के साथ कार्य किया है। वे राजनीतिक, सामाजिक और समसामयिक विषयों पर आधारित डिजिटल कंटेंट और ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा अश्वनी तिवारी का जन्म 4 फरवरी 1997 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज, भेलूपुर, वाराणसी से प्राप्त की। हाई स्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षाएं उन्होंने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से स्नातक (B.A.) की डिग्री प्राप्त की तथा आगे चलकर मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पूरी की। अश्वनी तिवारी ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कंटेंट राइटिंग और डिजिटल मीडिया से की। उन्होंने 10 दिसंबर 2023 से 15 मार्च 2024 तक India Watch, लखनऊ में कंटेंट राइटर के रूप में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल मीडिया कंटेंट पर कार्य किया। इसके बाद उन्होंने 7 मई 2024 से 9 जुलाई 2024 तक Zee News, नोएडा में कंटेंट राइटर के रूप में इंटर्नशिप की। इस दौरान वे न्यूज़ स्क्रिप्ट, डिजिटल कंटेंट और मीडिया रिसर्च से जुड़े रहे। अक्टूबर 2024 से अप्रैल 2025 तक उन्होंने Suman TV, हैदराबाद में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। यहां उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित समाचार एवं डिजिटल कंटेंट तैयार किए। वर्तमान में UP News Network से सब एडिटर के रूप में जुड़े, जहां उन्होंने कंटेंट राइटिंग, एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग का कार्य किया। इस दौरान वे ‘खरी खोटी’ नामक विशेष शो का भी हिस्सा रहे। उन्होंने कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग तथा वीडियो प्रस्तुति की। वर्तमान में अश्वनी तिवारी मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। अश्वनी तिवारी डिजिटल पत्रकारिता और न्यूज़ प्रोडक्शन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनकी विशेषज्ञता कंटेंट राइटिंग, एंकरिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया आधारित न्यूज़ प्रस्तुति में मानी जाती है।