सीक्रेट ऑपरेशन का बड़ा खुलासा… 36 घंटे में ईरान से सैनिक को छुड़ाने के लिए अमेरिका ने खेले 3 खतरनाक दांव
US Rescues Soldier: अमेरिका ने 36 घंटे के कठिन ऑपरेशन के बाद ईरान में फंसे अपने सैनिक को सुरक्षित बचा लिया। इस मिशन में CIA की चाल, सड़कों को नष्ट करना और हेलिकॉप्टर उड़ाना शामिल था। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक सफलता बताया, हालांकि अमेरिका को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा।
जंग के बीच अमेरिका ने 36 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद ईरान में फंसे अपने एक सैनिक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन को इतिहास का सबसे चुनौतीपूर्ण और सफल ऑपरेशन बताया। वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन में अमेरिका ने रणनीति और चालाकी का सहारा लिया। हालांकि मिशन आसान नहीं था और इसमें अमेरिका को भारी नुकसान भी हुआ। इस दौरान उसके 2 हेलिकॉप्टर और एक जहाज पूरी तरह नष्ट हो गए। इसके बावजूद अमेरिका अपने सैनिक को बचाने में सफल रहा।
CIA का माइंडगेम और झूठी खबर की रणनीति
ऑपरेशन की शुरुआत में अमेरिका ने ईरान के साथ माइंडगेम खेला। CIA ने जानबूझकर यह फर्जी खबर फैलाई कि लापता सैनिक को पहले ही बचा लिया गया है। इस खबर को फैलाने के लिए बड़े अधिकारियों के बयान भी दिलवाए गए। इसका असर यह हुआ कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड अपने ऑपरेशन का रास्ता बदलने पर मजबूर हो गई। इसके बाद CIA ने लोकेशन ट्रेस कर सैनिक से संपर्क किया और उसे ऊंचाई वाले स्थान पर पहुंचने को कहा।
सड़कों को तबाह कर रोका दुश्मन का रास्ता
जैसे ही सैनिक की लोकेशन मिली, अमेरिकी सेना ने पहाड़ की ओर जाने वाली सड़कों को नष्ट करना शुरू किया। सैटेलाइट तस्वीरों में सड़क पर 500-500 मीटर की दूरी पर करीब 28 बड़े गड्ढे दिखाई दिए। ऐसा इसलिए किया गया ताकि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड उस जगह तक न पहुंच सके। इस दौरान अमेरिकी सैनिकों को भारी गोलीबारी का भी सामना करना पड़ा।
अंतिम चरण में गुफाओं से निकाला सैनिक
ऑपरेशन के आखिरी चरण में अमेरिकी सील टीम ने पहाड़ की गुफाओं से सीधे सैनिक को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद नीचे गिरे हेलिकॉप्टर और जहाजों को बम गिराकर नष्ट कर दिया गया, ताकि कोई सबूत न बचे। सैनिक को सुरक्षित सीमा से बाहर लाने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने इसकी जानकारी दी।
100 से ज्यादा सैनिक और ट्रंप की निगरानी
इस मिशन में 100 से ज्यादा सील सैनिक शामिल थे। CIA के अधिकारी भी लगातार संपर्क में थे। पूरे ऑपरेशन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप व्हाइट हाउस में ही रहे और हर गतिविधि पर नजर रखते रहे। अमेरिका 1980 जैसी गलती दोहराना नहीं चाहता था, जब ऑपरेशन ईगल में उसके 12 जवान फंस गए थे। इस बार उसने पूरी तैयारी के साथ मिशन को अंजाम दिया।
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