ED की दस्तक से यूपी में सियासी हलचल, सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण यादव के ठिकानों पर छापेमारी, अखिलेश बोले- जहां CC का माल है वहां नहीं जाते
सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण यादव के ठिकानों पर ED की छापेमारी ने यूपी की सियासत में हलचल मचा दी है। आय से अधिक संपत्ति, मनी लॉन्ड्रिंग जांच और 23 से ज्यादा FIR के बीच अखिलेश यादव ने जांच एजेंसी पर सवाल उठाए हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुधवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनसे जुड़े लोगों के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। झांसी और लखनऊ में हुई इस कार्रवाई को लेकर अब सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है। ED की कार्रवाई के बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर निशाना साधते हुए सवाल खड़े किए हैं। वहीं, जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच के तहत की गई है।
आय से अधिक संपत्ति के मामले से जुड़ी है जांच
प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टैब्लिशमेंट की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई है। इस एफआईआर में पूर्व विधायक दीप नारायण यादव पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए थे। इसी आधार पर ED ने पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अवैध कमाई को किस तरह इस्तेमाल किया गया और किन माध्यमों से उसे छिपाने की कोशिश की गई।
रियल एस्टेट और कंपनियों के नेटवर्क पर ED की नजर
ED की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कथित अपराध से अर्जित धन को रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन और अन्य कारोबारी गतिविधियों से जुड़ी कंपनियों और एलएलपी के जरिए निवेश किया गया। जांच एजेंसी को शक है कि कुछ संस्थाओं का इस्तेमाल अवैध धन को वैध दिखाने के लिए किया गया। ED अब इन कंपनियों के वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और दस्तावेजों की जांच कर रही है।
23 से ज्यादा एफआईआर का भी जिक्र, बढ़ सकता है जांच का दायरा
ED के मुताबिक, इस मामले की जांच में कई आपराधिक मामलों का लिंक सामने आया है। एजेंसी को जानकारी मिली है कि इस पूरे प्रकरण से जुड़े मामलों में 23 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हैं। इन एफआईआर और उनसे जुड़े दस्तावेजों के आधार पर ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अपराध से हासिल धन किन-किन लोगों तक पहुंचा और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।
छापेमारी में क्या-क्या मिला?
ED की टीम ने तलाशी अभियान के दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। इसके अलावा बैंकिंग लेनदेन, निवेश और कारोबारी गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। एजेंसी अब बरामद डिजिटल और दस्तावेजी सबूतों का विश्लेषण कर रही है।
ED की कार्रवाई पर अखिलेश यादव का हमला
ED की रेड के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिक्रिया देते हुए जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि छापा मारना चाहिए कर्नाटक और महाराष्ट्र में, मार रहे हैं यूपी में। इसके आगे अखिलेश यादव ने कहा, "जहां CC का माल है वहां नहीं जाते हैं, बस दिखावटी औपचारिकता निभाते हैं।" अखिलेश के इस बयान के बाद यूपी की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
अब आगे क्या?
ED की जांच अभी शुरुआती चरण में है। एजेंसी बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में संपत्तियों, कंपनियों और कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल इस कार्रवाई ने एक बार फिर यूपी में जांच एजेंसियों और राजनीति के बीच चल रही बहस को तेज कर दिया है।
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