नोएडा कार हादसे में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत: SIT रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
नोएडा के सेक्टर 150 में एक कार दुर्घटना में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के तीन महीने बाद, एसआईटी रिपोर्ट जमा कर दी गई है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक कार हादसे में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस हादसे को तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है। मामले की जांच के लिए बनाई गई (SIT) ने लगभग एक महीने पहले अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी। इसके बावजूद अब तक दोषियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और न ही किसी अधिकारी या जिम्मेदार पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस वजह से प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने का इंतजार बना हुआ है।
15-16 जनवरी की रात हुआ था हादसा
यह हादसा 15-16 जनवरी 2026 की रात सेक्टर-150 इलाके में हुआ था। जानकारी के अनुसार उस समय सड़क के पास एक बड़ा गड्ढा पानी से भरा हुआ था। इसी गड्ढे में कार गिरने से इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था। जांच दल ने घटना से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी।
रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने में हुई देरी
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार हादसे के बाद बचाव कार्य यानी रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने में काफी देर हुई थी। मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन के पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे। साथ ही तत्काल निर्णय लेने की व्यवस्था भी प्रभावी नहीं थी। SIT की रिपोर्ट में बताया गया है कि रेस्क्यू ऑपरेशन देर से शुरू होना युवराज मेहता की मौत का एक बड़ा कारण बन सकता है।
बिना बैरिकेडिंग के खुला छोड़ दिया गया था गड्ढा
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिस गड्ढे में कार गिरी थी, उसे बिना किसी बैरिकेडिंग के खुला छोड़ दिया गया था। इतना ही नहीं, उस स्थान पर पहले भी छोटे-मोटे हादसे हो चुके थे। इसके बावजूद संबंधित विभागों ने वहां न तो चेतावनी बोर्ड लगाए और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए।
कई विभागों की भूमिका पर उठे सवाल
SIT की रिपोर्ट में नोएडा प्राधिकरण के प्लानिंग, सिविल और ट्रैफिक विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है। इसके अलावा एक बिल्डर की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया है। हालांकि रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के करीब एक महीने बाद भी किसी अधिकारी या जिम्मेदार पक्ष के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में युवराज मेहता की मौत के मामले में जवाबदेही तय करने और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
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