कैश विवाद के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा, जांच के बाद हटाए जाने की प्रक्रिया तेज
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने नकदी विवाद के बीच इस्तीफा दे दिया है, जबकि जांच और बर्खास्तगी की प्रक्रिया जारी है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उनके घर पर कथित रूप से नकदी मिलने के विवाद के बाद यह मामला काफी चर्चा में रहा। इससे पहले उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर किया गया था। फिलहाल उनके खिलाफ इन-हाउस जांच जारी है और उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया भी चल रही है। इस पूरे मामले ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है।
कैश मिलने के आरोप के बाद बढ़ा विवाद
पिछले साल मार्च में जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित घर से जले हुए नोट मिलने की खबर सामने आई थी। उस समय वह दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यरत थे। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया। इसके बाद उन्हें तुरंत इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेज दिया गया था। यह मामला तब से लगातार चर्चा में बना हुआ है।
एक साल से चल रही हटाने की प्रक्रिया
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया पिछले साल अगस्त में शुरू हुई थी। उस समय लोकसभा में उनके खिलाफ बहुदलीय नोटिस लाया गया, जिसमें उन्हें न्यायाधीश पद से हटाने की मांग की गई। यह प्रक्रिया करीब एक साल से जारी है और अब इसमें तेजी आ गई है।
जांच के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति
ओम बिरला, जो लोकसभा अध्यक्ष हैं, उन्होंने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में अरविंद कुमार, मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य को शामिल किया गया था। बाद में फरवरी में बदलाव करते हुए चंद्रशेखर को भी समिति में जोड़ा गया।
रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगी कार्रवाई
समिति की जांच अभी जारी है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर पार्लियामेंट्री रिमूवल प्रोसीडिंग्स भी शुरू हो सकती हैं। ऐसे में उनका इस्तीफा इस पूरे मामले में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
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