बिजनेस करने वालों की चांदी… मोदी सरकार लाएगी 2.5 लाख करोड़ की योजना, अब नहीं रुकेगा काम
India Credit Guarantee Scheme: सरकार 2.5 लाख करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी योजना ला सकती है, जिससे MSME और एयरलाइंस सेक्टर को राहत मिलेगी। यह योजना ECLGS का विस्तार होगी। कैबिनेट मंजूरी के बाद लागू होगी और नकदी संकट, बढ़ती लागत व आर्थिक दबाव से जूझ रहे कारोबारों को सहारा देगी।
भारत में आर्थिक दबाव झेल रहे कारोबारों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। वित्त मंत्रालय ने 2.5 लाख करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी योजना का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। यह योजना खासतौर पर MSME, एयरलाइंस और पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित अन्य व्यवसायों को मदद देने के लिए बनाई गई है। सरकार इस योजना के जरिए नकदी की कमी से जूझ रहे सेक्टर को सहारा देना चाहती है। मंत्रालयों के बीच परामर्श पूरा हो चुका है और अब इसे जल्द ही कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है। इससे आर्थिक गतिविधियों को स्थिर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट मंजूरी से पहले अहम प्रक्रिया पूरी
इस योजना को वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (EFC) पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इसका मतलब है कि योजना की लागत, ढांचा और असर की पूरी जांच हो चुकी है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, EFC की सिफारिशों के बाद प्रस्ताव कैबिनेट प्रक्रिया में चला गया है। इसमें कैबिनेट नोट तैयार करना और अलग-अलग मंत्रालयों से सलाह लेना शामिल होता है। फिलहाल यह प्रस्ताव उसी चरण में है और अंतिम फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही होगा।
ECLGS के विस्तार के रूप में तैयार योजना
यह नई योजना आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) के विस्तार के रूप में तैयार की जा रही है। ECLGS को 2020 में कोरोना महामारी के दौरान MSME सेक्टर को राहत देने के लिए शुरू किया गया था। अब सरकार इसे बड़े स्तर पर लागू करना चाहती है, ताकि वर्तमान वैश्विक संकट से प्रभावित सेक्टर को मदद मिल सके। यह एक सरकारी गारंटी वाली लोन सहायता योजना होगी।
किन सेक्टर को मिलेगा फायदा
इस योजना का मुख्य उद्देश्य MSME, एयरलाइंस और अन्य प्रभावित व्यवसायों को नकदी उपलब्ध कराना है। पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ती लागत और सप्लाई में रुकावट से इन सेक्टर पर दबाव बढ़ा है। सरकार चाहती है कि कंपनियां लोन चुकाने में डिफॉल्ट न करें और उन्हें लगातार फंड मिलता रहे। इससे आर्थिक स्थिरता बनी रह सकती है।
एविएशन सेक्टर पर खास फोकस
इस योजना में विमानन क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं। ईंधन की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव के कारण एयरलाइंस कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, आयात पर निर्भर MSME और वे कारोबार जो वैश्विक मांग पर निर्भर हैं, उन्हें भी इस योजना से राहत मिलने की उम्मीद है।
क्यों जरूरी है यह कदम
पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। इससे कमोडिटी कीमतों और व्यापार पर असर पड़ा है। सरकार का मानना है कि पिछले वित्त वर्ष में स्थिति ठीक रही, लेकिन अब नए आर्थिक जोखिम सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह योजना संकट से निपटने का अहम कदम हो सकती है।
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