योगी सरकार किसे बनाएगी यूपी का नया DGP, मई के अंत तक होगा ऐलान, जानिए लिस्ट में कौन-कौन से नाम शामिल
उत्तर प्रदेश को मई के अंत तक नया स्थायी DGP मिल सकता है। IPS अफसर राजीव कृष्णा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। जानिए किन अधिकारियों के नाम रेस में हैं और किस वजह से बदल रहे हैं समीकरण...
उत्तर प्रदेश को जल्द नया स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने जा रहा है। माना जा रहा है कि मई के आखिर तक सरकार नए डीजीपी के नाम का आधिकारिक ऐलान कर सकती है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजे गए वरिष्ठ IPS अफसरों के नामों में से तीन नामों पर सहमति बन चुकी है। अब अंतिम फैसला सरकार को लेना है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्णा इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार उनके नाम पर मुहर लगा सकती है।
रेणुका मिश्रा सबसे वरिष्ठ, लेकिन सरकार की नाराजगी भारी
यूपी कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारियों की सूची में 1990 बैच की रेणुका मिश्रा का नाम सबसे ऊपर है। हालांकि, सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले के बाद से सरकार उनसे नाराज बताई जा रही है। जुलाई 2024 से वह डीजीपी मुख्यालय से अटैच चल रही हैं। ऐसे में भले ही उनका नाम UPSC पैनल में शामिल हो, लेकिन सरकार उनके नाम पर गंभीरता से विचार करेगी, इसकी संभावना काफी कम मानी जा रही है।
आलोक शर्मा का रिटायरमेंट बना वजह
इस सूची में दूसरा नाम 1991 बैच के IPS अधिकारी और वर्तमान SPG डायरेक्टर आलोक शर्मा का है। हालांकि, उनका अगले महीने रिटायरमेंट होने वाला है। ऐसे में स्थायी डीजीपी की रेस में उनकी दावेदारी लगभग खत्म मानी जा रही है।
पीयूष आनंद का पुराना विवाद भी बना चर्चा का विषय
तीसरे वरिष्ठ अधिकारी 1991 बैच के पीयूष आनंद हैं, जो इस समय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर DG NDRF के पद पर तैनात हैं। हालांकि, पीएसी में प्रमोशन से जुड़े एक पुराने आदेश को लेकर सरकार पहले ही असहज हो चुकी है। उस आदेश के बाद सरकार की काफी किरकिरी हुई थी और बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद आदेश वापस लेना पड़ा था।
क्यों सबसे मजबूत माने जा रहे हैं राजीव कृष्णा?
इन तमाम समीकरणों के बीच मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्णा का नाम सबसे मजबूत माना जा रहा है। राजीव कृष्णा फिलहाल डीजी विजिलेंस के पद पर भी तैनात हैं। सबसे अहम बात यह है कि हाल ही में हुई सिपाही भर्ती परीक्षा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने का श्रेय भी उन्हें दिया जा रहा है। सरकार ने इसी भरोसे के चलते कई वरिष्ठ अधिकारियों को पीछे छोड़ते हुए उन्हें कार्यवाहक डीजीपी बनाया था। उनका रिटायरमेंट जून 2029 में होना है, इसलिए लंबे कार्यकाल का फायदा भी उनके पक्ष में जाता दिख रहा है।
मई के अंत तक हो सकता है बड़ा ऐलान
सूत्रों के मुताबिक, UPSC से जैसे ही तीन नामों का अंतिम पैनल राज्य सरकार को मिलेगा, उसके बाद नए स्थायी डीजीपी के नाम पर मुहर लग सकती है। माना जा रहा है कि मई के आखिरी सप्ताह तक इस पर आधिकारिक घोषणा हो सकती है।
उत्तर प्रदेश में क्यों अहम है स्थायी DGP?
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में डीजीपी का पद सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं होता। आने वाले समय में प्रदेश में कई बड़े आयोजन, चुनावी तैयारियां और कानून-व्यवस्था की चुनौतियां हैं। ऐसे में सरकार एक ऐसे चेहरे पर दांव लगाना चाहती है, जिस पर भरोसा भी हो और प्रशासनिक पकड़ भी मजबूत हो।
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