प्रधानमंत्री की अपील के बाद गोल्ड पर चर्चा तेज, जानिए भारत के लिए कितना जरूरी है सोना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना न खरीदने की अपील के बाद भारत में गोल्ड आयात, मांग और अर्थव्यवस्था पर इसके असर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानिए भारत हर साल कितना सोना आयात करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद देशभर में गोल्ड की मांग, सप्लाई और अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है और हर साल बड़ी मात्रा में विदेशों से सोना आयात करता है। ऐसे में प्रधानमंत्री की अपील को अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा बचाने के प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोना भारतीय परिवारों की बचत और निवेश का बड़ा हिस्सा है, लेकिन इसका भारी आयात देश के विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता घाटे पर दबाव भी बढ़ाता है।
भारत हर साल करता है भारी मात्रा में सोने का आयात
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश माना जाता है। देश में हर साल करीब 700 से 900 टन सोने की खपत होती है। इसकी कीमत लगभग 50 से 60 अरब डॉलर या उससे भी ज्यादा होती है। देश की 90 प्रतिशत से अधिक जरूरतें आयात के जरिए पूरी की जाती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में घरेलू उत्पादन केवल 1 से 2 टन के आसपास ही है, इसलिए भारत को लगभग पूरी तरह विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है।
अर्थव्यवस्था पर क्यों पड़ता है असर?
सोने का आयात सीधे तौर पर फैक्ट्रियों या उत्पादन को बढ़ाने में ज्यादा मदद नहीं करता, लेकिन इसके लिए बड़ी मात्रा में डॉलर खर्च होते हैं। इससे भारत के चालू खाता घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ता है। खासकर तब जब कच्चे तेल की कीमतें भी ज्यादा हों। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा भी विदेशों से खरीदता है। ऐसे में सरकार गैर जरूरी आयात कम करने पर जोर दे रही है।
मुश्किल समय में सहारा बनता है सोना
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार सोना निवेशकों को स्थिरता देता है। जब शेयर बाजार में गिरावट आती है या दुनिया में युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तब लोग सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं। यही वजह है कि भारत में सोने की मांग हमेशा बनी रहती है।
लगातार घट रहा है गोल्ड इंपोर्ट
साल 2026 में सोने के आयात में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। जनवरी में जहां करीब 100 टन सोना आयात हुआ था, वहीं फरवरी में यह घटकर 65-66 टन और मार्च में केवल 20-22 टन रह गया। कोविड काल को छोड़ दें तो यह पिछले करीब 30 वर्षों के सबसे निचले स्तरों में से एक माना जा रहा है।
क्या है गिरावट की वजह?
रिपोर्ट्स के मुताबिक केवल बढ़ती कीमतें ही इसकी वजह नहीं हैं। बैंक अनुमति, सीमा शुल्क नियमों में देरी और GST से जुड़ी समस्याओं के कारण भी आयात प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इससे बाजार में सप्लाई धीमी हो गई है और सोने के कारोबार पर असर पड़ा है।
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