हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, यूपी असिस्टेंट प्रोफेसर पुनर्परीक्षा केवल 5 विषयों तक सीमित
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि उत्तर प्रदेश में सहायक प्रोफेसर की भर्ती में पुनर्परीक्षा मूल्यांकन केवल 5 विषयों तक सीमित रहेगा, जिससे 28 विषयों के उम्मीदवारों को राहत मिलेगी।
हाईकोर्ट से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जहां इलाहबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी विषयों की पुनर्परीक्षा कराने के निर्णय में बदलाव करते हुए कहा कि केवल उन्हीं विषयों की कॉपियों का मूल्यांकन किया जाए, जिनमें पेपर लीक के सबूत मिले हैं। इस फैसले से 28 विषयों के हजारों उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्दोष उम्मीदवारों को बिना वजह परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
पूरी परीक्षा रद्द करना बताया अनुचित
यह फैसला जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुवेर्दी की खंडपीठ ने दिया। कोर्ट ने कहा कि 33 विषयों की पूरी परीक्षा रद्द करना सही नहीं था, क्योंकि जांच में पेपर लीक के सबूत केवल 5 विषयों तक ही सीमित पाए गए।
पुनर्परीक्षा का दायरा किया सीमित
कोर्ट ने आदेश दिया कि 18 अप्रैल 2026 को होने वाली पुनर्परीक्षा जारी रहेगी, लेकिन उसका मूल्यांकन केवल 5 विषयों—उर्दू, हिंदी, भूगोल, समाजशास्त्र और जंतु विज्ञान—तक ही सीमित रहेगा। बाकी 28 विषयों की ओएमआर शीट का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा।
28 विषयों के उम्मीदवारों को राहत
हाईकोर्ट ने कहा कि जिन 28 विषयों में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है, उनके उम्मीदवारों को सजा नहीं दी जा सकती। इन विषयों में अंग्रेजी, रसायन विज्ञान, कानून, इतिहास और भौतिकी जैसे विषय शामिल हैं। इन विषयों के लिए अप्रैल 2025 की मूल परीक्षा के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
पेपर लीक जांच में सामने आए तथ्य
जानकारी के अनुसार, 16 और 17 अप्रैल 2025 को 33 विषयों में 910 पदों के लिए परीक्षा हुई थी। बाद में पेपर लीक की जांच में आयोग के एक कर्मचारी महबूब अली और 18 उम्मीदवारों की संलिप्तता सामने आई। लेकिन कोर्ट ने पाया कि इसका असर केवल 5 विषयों तक ही था।
साक्षात्कार के लिए नई प्रक्रिया तय
कोर्ट ने निर्देश दिया कि अंतिम साक्षात्कार के लिए 28 विषयों के उम्मीदवारों को पुरानी परीक्षा से शॉर्टलिस्ट किया जाए, जबकि 5 दागदार विषयों के लिए पुनर्परीक्षा से नए उम्मीदवार चुने जाएं। इसके बाद दोनों को मिलाकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
निष्पक्षता पर जोर, आंशिक रूप से स्वीकार हुई अपील
हाईकोर्ट ने विशेष अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है। यह फैसला सुनिश्चित करता है कि जिन उम्मीदवारों पर कोई आरोप नहीं है, उन्हें अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े।
(रिपोर्टः राम किशन, कौशांबी)
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