भाजपा नेता को थप्पड़ मारने वाले IAS रिंकू सिंह राही का तबादला, कभी 100 करोड़ के स्कॉलरशिप घोटाले का किया था खुलासा, फील्ड पोस्टिंग न मिलने पर राष्ट्रपति को भेजा था इस्तीफा
भाजपा ब्लॉक प्रमुख से धक्का-मुक्की का वीडियो सामने आने के महज एक दिन बाद IAS रिंकू सिंह राही का तबादला कर दिया गया। लेकिन क्या यह सिर्फ एक सामान्य प्रशासनिक फैसला है या इसके पीछे कोई बड़ी कहानी छिपी है? जिस अधिकारी ने कभी 100 करोड़ रुपये के स्कॉलरशिप घोटाले का खुलासा कर अपनी जान दांव पर लगा दी थी, जिसने फील्ड पोस्टिंग न मिलने पर राष्ट्रपति को इस्तीफा भेज दिया था, वही अधिकारी अब एक नए विवाद के बाद फिर सुर्खियों में है। आखिर भाजपा नेताओं की शिकायतों से लेकर जांच समिति के गठन तक क्या-क्या हुआ, तबादले के आदेश में क्या लिखा है...
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही चर्चा के केंद्र में हैं। वजह इस बार कोई प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि भाजपा ब्लॉक प्रमुख के साथ हुई धक्का-मुक्की का विवाद है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने और राजनीतिक शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने उन्हें जालौन से हटाकर उरई में एसडीएम (न्यायिक) के पद पर तैनात कर दिया। हालांकि आदेश में तबादले की कोई वजह नहीं बताई गई, लेकिन घटनाक्रम ने पूरे मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना दिया है।
वीडियो से शुरू हुआ विवाद, शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
पूरा मामला 23 जून का बताया जा रहा है। आरोप है कि किसी प्रशासनिक कार्य के दौरान भाजपा ब्लॉक प्रमुख रामराज निरंजन और तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही के बीच तीखी बहस हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि रिंकू सिंह ने ब्लॉक प्रमुख का मोबाइल हाथ मारकर नीचे गिरा दिया और उन्हें धक्का देकर पीछे कर दिया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया। सोमवार को ब्लॉक प्रमुख ने मीडिया के सामने वीडियो जारी करते हुए जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। इसके बाद जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित कर दी। जांच के आदेश के अगले ही दिन प्रशासनिक फेरबदल करते हुए रिंकू सिंह राही का तबादला कर दिया गया।
अब उरई में मिली नई जिम्मेदारी
जिलाधिकारी कार्यालय से जारी आदेश के मुताबिक रिंकू सिंह राही को तत्काल प्रभाव से ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी (न्यायिक), उरई के पद पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं उनकी जगह राकेश कुमार सोनी को जालौन का नया एसडीएम बनाया गया है। दोनों अधिकारियों को तत्काल कार्यभार हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि प्रशासन ने इस तबादले को सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बताया है और आदेश में किसी विवाद या जांच का उल्लेख नहीं किया गया है।
भाजपा विधायक भी पहले जता चुके थे नाराजगी
यह पहली बार नहीं है जब रिंकू सिंह राही को लेकर राजनीतिक असहमति सामने आई हो। करीब एक महीने पहले जालौन सदर से भाजपा विधायक गौरीशंकर वर्मा ने भी उनके कामकाज पर सवाल उठाए थे। उस समय भी प्रशासनिक स्तर पर उनकी कार्यशैली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
फील्ड पोस्टिंग न मिलने पर राष्ट्रपति को भेजा था इस्तीफा
रिंकू सिंह राही का नाम इसी साल मार्च में भी सुर्खियों में आया था। उन्होंने राष्ट्रपति को कंडीशनल इस्तीफा भेजते हुए कहा था कि उन्हें वेतन तो मिल रहा है, लेकिन जनता के बीच काम करने का अवसर नहीं मिल रहा। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया था कि यदि फील्ड पोस्टिंग नहीं दी जा सकती तो उन्हें उनकी पुरानी PCS सेवा में वापस भेज दिया जाए। उस समय उन्होंने यह भी कहा था कि एक अधिकारी के लिए कुर्सी से ज्यादा महत्वपूर्ण जनता के बीच काम करने का अवसर होता है। उनके इस कदम ने प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा बटोरी थी।
13 महीने बाद मिली थी फील्ड पोस्टिंग
रिंकू सिंह राही 2021 बैच के IAS अधिकारी हैं। इससे पहले उन्हें शाहजहांपुर से हटाकर राजस्व परिषद मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। करीब 13 महीने तक फील्ड पोस्टिंग नहीं मिलने के बाद हाल ही में उन्हें जालौन में तैनाती मिली थी। लेकिन यह पोस्टिंग भी ज्यादा लंबी नहीं चल सकी और अब उन्हें उरई भेज दिया गया है।
100 करोड़ के घोटाले का किया था खुलासा
रिंकू सिंह राही की पहचान सिर्फ एक IAS अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले अधिकारी के तौर पर भी रही है। वर्ष 2009 में जब वह मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी थे, तब उन्होंने करीब 100 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा किया था। घोटाले का पर्दाफाश करने के कुछ समय बाद उन पर सात राउंड फायरिंग की गई। हमले में उनके चेहरे पर दो गोलियां लगीं, जिससे उनका चेहरा गंभीर रूप से घायल हो गया। लंबे इलाज के बाद वह वापस सेवा में लौटे और उनकी कहानी पूरे देश में चर्चा का विषय बनी।
इस्तीफे के बाद हुई थी दस्तावेजों की जांच
मार्च में इस्तीफा भेजे जाने के बाद शासन स्तर पर भी हलचल मच गई थी। सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने उनकी पूर्व सेवाओं, कार्यशैली, शैक्षणिक दस्तावेजों और जाति प्रमाण पत्र तक की जांच कराई। लेकिन जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने नहीं आई।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
